130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी पहली वंदे भारत फ्रेट EMU, अहमदाबाद-मुंबई के बीच ट्रायल
मुंबई: देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू ( Vande Bharat Freight EMU ) का शनिवार और रविवार को पश्चिम रेलवे के नेटवर्क पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया गया। यह ट्रायल अहमदाबाद से मुंबई सेंट्रल के बीच शनिवार और मुंबई सेंट्रल से अहमदाबाद के बीच रविवार को हुआ। यह ट्रायल रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा किया गया। जांच के लिए अहमदाबाद–वडोदरा–मुंबई सेंट्रल सेक्शन पर कंफर्मेटरी ओसिलोग्राफ कार रन (सीओसीआर) किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य फ्रेट ईएमयू की स्थिरता, चलने की क्षमता और 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की जांच करना था।
फ्रेट ईएमयू को आईसीडी (इन लैंड कंटेनर डिपो) साबरमती में रखा गया था। ट्रायल से पहले आरडीएसओ की टीम ने अहमदाबाद डिविजन के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और एस एंड टी विभागों की मदद से ट्रेन में जरूरी उपकरण लगाए। ट्रेन सुबह करीब 9 बजे अहमदाबाद से मुंबई सेंट्रल के लिए रवाना किया गया । पश्चिम रेलवे ने इस ट्रायल के लिए ट्रेन को पूरा रास्ता उपलब्ध कराया। दिन के समय हुए इस ट्रायल में रेलवे के सभी स्थायी और अस्थायी स्पीड प्रतिबंधों का पालन किया गया। फिर रविवार सुबह 9 बजे इसे मुंबई सेंट्रल से अहमदाबाद के लिए रवाना किया गया।
इस फ्रेट रेक में 50% पावर लोडिंग और 20.32 टन एक्सल लोड वाला कोच लगाया गया था। ट्रेन में लगे सेंसर और डेटा एक्विजिशन सिस्टम के जरिए रनिंग के दौरान कई तरह की जानकारी रिकॉर्ड की गई। इस डेटा से आरडीएसओ यह जांच करेगा कि 130 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पर ट्रेन किस तरह चलती है और उसकी स्थिरता व प्रदर्शन कैसा रहता है। ट्रायल में वंदे भारत क्रू के साथ गार्ड, चीफ लोको इंस्पेक्टर, ट्रैफिक इंस्पेक्टर और परमानेंट वे इंस्पेक्टर भी मौजूद रहे। सी एंड डब्ल्यू और एस एंड टी के कर्मचारी भी ट्रेन में साथ थे। रास्ते में किसी तकनीकी समस्या से निपटने के लिए आईसीएफ, मेधा और केर्ण के तकनीकी कर्मचारी भी तैयार रखे गए थे। ट्रेन में महंगे टेस्टिंग उपकरण लगाए गए थे, इसलिए अहमदाबाद और मुंबई सेंट्रल पर सुरक्षा टीमों को चौबीसों घंटे निगरानी के लिए तैनात किया गया था।
दो दिन के इस ट्रायल से मिलने वाले डेटा के आधार पर रेलवे को यह तय करने में मदद मिलेगी कि वंदे भारत को तेज माल ढुलाई के लिए किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ट्रायल इसलिए अहम है क्योंकि अगर वंदे भारत तकनीक पर आधारित फ्रेट सेवा सफल रहती है, तो हाई-वैल्यू और समय के लिहाज से महत्वपूर्ण सामान को मौजूदा मालगाड़ियों की तुलना में अधिक तेज और भरोसेमंद तरीके से पहुंचने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
