हिंद महासागर में दाखिल हुआ चौथा चीनी जासूसी जहाज, भारत की K-4 मिसाइल को खतरा

भारत हिंद महासागर में मिसाइल परीक्षण की योजना बना रहा है। इसके लिए समुद्र के एक बड़े इलाके में नोटम (NOTAM) भी जारी किया गया है। इसमें ओडिशा के चांदीपुर टेस्टिंग रेंज से बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के निर्धारित इलाके को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस बीच इस इलाके में चीन के चार-चार जासूसी जहाजों के पहुंचने से हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। ये सभी चीनी जासूसी जहाज अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में ऑपरेट हो रहे हैं, लेकिन इनकी रेंज समुद्र की तलहटी से लेकर आसमान की ऊंचाईयों तक हर छोटी-बड़ी हरकत पर नजर रखने की है। ऐसे में भारत के मिसाइल परीक्षण को खतरा पैदा हो गया है। चीन के तीन जासूसी जहाज पहले से ही हिंद महासागर में ऑपरेट हो रहे हैं। इनमें जासूसी जहाज शी यान 6 अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पास मौजूद है। यह जहाज कुछ दिनों पहले ही मलक्का जलडमरूमध्य से हिंद महासागर में प्रवेश किया था। दूसरा जासूसी जहाज शेन ही यी हाओ हिंद महासागर में अंडमान निकोबार के दक्षिण में ऑपरेट कर रहा है। वहीं, तीसरा जासूसी जहाज लेन हाई 201 मालदीव के पास मौजूद है और समुद्र का सर्वे कर रहा है। अभी चौथा जासूसी जहाज लेन हाई 101 मलक्का जलडमरूमध्य से हिंद महासागर की ओर बढ़ता दिखा है।

चीन अपने जासूसी जहाजों को सर्वेक्षण पोत बताता है। उसने हर बार इस बात से इनकार किया है कि ये जहाज जासूसी मिशन को अंजाम देते हैं। हालांकि, चीन इन जासूसी जहाजों का इस्तेमाल सैन्य और वैज्ञानिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए करता है। इसमें समुद्री तक के मानचित्रण के अलावा आसमान में जासूसी तक शामिल हैं। इन जहाजों में लगे सिस्टम दुश्मन के देश के हवाई यातायात पर नजर रख सकते हैं। इतना ही नहीं, ये सोनार सिग्नल को डिकेक्ट कर युद्धपोतों और पनडु्ब्बियों की कॉल साइन तक जान सकते हैं। इसके अलावा हवा में लॉन्च मिसाइलों की स्पेसिफिकेशन की भी जानकारी जुटा सकते हैं।

नोटम को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि भारत जल्द ही पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली मिसाइल के-4 का परीक्षण कर सकता है। यह नोटम 1 से 4 दिसंबर के बीच प्रभावी है। इसमें 3484 किलोमीटर के क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। के-4 मध्यम दूरी की पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। इसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है और यह ठोस रॉकेट प्रणोदक से चलती है। इसे मुख्य रूप से भारतीय नौसेना की अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों को लैस करने के लिए बनाया गया है।

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