वासेपुर का गैंगस्टर 13 साल अंबिकापुर में छिपा रहा, बसें-एम्बुलेंस चलाकर करोड़ों का कारोबार खड़ा किया

छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर शहर उस समय चर्चा में आ गया, जब वहां झारखंड के एक बड़े गैंगस्टर के छिपे होने का खुलासा हुआ. झारखंड का कुख्यात अपराधी सब्बीर अली 13 साल से यहां अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. उसने न केवल यहां पनाह ली, बल्कि करोड़ों रुपये का एक बड़ा कारोबारी साम्राज्य भी खड़ा कर लिया था.
सब्बीर अली अंबिकापुर में एक आलीशान मकान बनाकर अपने परिवार के साथ रह रहा था. उसने शहर के एक बस संचालक बैदुल खान के साथ व्यापारिक साझेदारी की थी. इस पार्टनरशिप के तहत वह कई बसें और 40 से अधिक एम्बुलेंस का संचालन कर रहा था. किसी को भनक तक नहीं थी कि एम्बुलेंस और बसों का यह बड़ा मालिक असल में झारखंड का एक मोस्ट वांटेड अपराधी है. करीब 3 दिन पहले झारखंड पुलिस ने अंबिकापुर में अचानक छापेमारी की. पुलिस को गैंगस्टर सब्बीर अली के यहां छिपे होने की सटीक जानकारी मिली थी. हालांकि, पुलिस के आने की भनक लगते ही गैंगस्टर सब्बीर और उसका एक साथी मौके से फरार होने में कामयाब हो गए. तब से पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.

गैंगस्टर को शरण देने और उसके साथ कारोबार करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कस गया है. सरगुजा पुलिस ने सब्बीर के सहयोगी और बिजनेस पार्टनर बैदुल खान सहित अन्य लोगों के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की है. पुलिस अब इन सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है.

सब्बीर अली का नाम झारखंड के कुख्यात ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से जुड़ा हुआ है. 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में एक भीषण हत्याकांड हुआ था. आरोप है कि सब्बीर आलम और उसके भाई शाहीद आलम ने डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को सरेआम गोली मार दी थी. इसी वारदात के बाद से सब्बीर फरार चल रहा था और अंबिकापुर में नाम बदलकर रह रहा था.

अंबिकापुर के एएसपी (ASP) अमोलक सिंह ढिल्लों ने बताया कि पुलिस अब इनके पूरे आर्थिक नेटवर्क की कुंडली खंगाल रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन 13 साल में सब्बीर ने और किन-किन स्थानीय लोगों की मदद ली. उसके अन्य मददगारों और बेनामी संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, ताकि उसके आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके.