छत्तीसगढ़ विधानसभा में अतिथि शिक्षक का गूंजा मुद्दा, मंत्री बोले- नियमितीकरण का प्रावधान नहीं
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा व्यवस्था, खासकर अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ. नियमितीकरण और कम मानदेय को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर सदन से वॉकआउट कर दिया. विधायक विक्रम मंडावी के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. यह भुगतान उनकी उपस्थिति के आधार पर होता है और सभी जिलों में समान है. मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के समय में नई भर्ती नहीं की गई है, बल्कि पुराने अतिथि शिक्षकों से ही काम लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार नियमित शिक्षकों की भर्ती पर ध्यान दे रही है.
जब अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण पर सवाल पूछा गया तो मंत्री ने साफ कहा कि इसके लिए कोई योजना या प्रावधान नहीं है. उन्होंने बताया कि नियमितीकरण केवल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होता है, जबकि अतिथि शिक्षक अलग श्रेणी में आते हैं.
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अतिथि शिक्षकों को उपस्थिति के आधार पर वेतन दिया जा रहा है, यानी वे व्यवहार में डेली वेजेस कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने “मोदी की गारंटी” का हवाला देते हुए पूछा कि जब नियमितीकरण का वादा किया गया था, तो इसे कब तक पूरा किया जाएगा. इस पर मंत्री ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि सरकार “मोदी की हर गारंटी” पूरी करेगी.
विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया कि अतिथि शिक्षकों को एक दिन की अनुपस्थिति पर वेतन काटा जाता है और उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां भी नहीं मिलतीं. इस पर भी मंत्री ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे विपक्ष और आक्रामक हो गया.
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने “मोदी की गारंटी पूरी करो” और “डबल इंजन फेल है” जैसे नारे लगाए. नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने आखिरी में सदन से वॉकआउट कर दिया.
