हरिवंश राज्यसभा के मनोनीत सांसद बने, उपसभापति बन सकते हैं, कार्यकाल 2032 तक रहेगा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया है। पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। इस सीट को भरने के लिए JD(U) के हरिवंश को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। 69 साल के हरिवंश अब 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे। राज्यसभा में कुल 12 सदस्य मनोनीत सांसद होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति ही तय करते हैं। इन सांसदों को कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है। दरअसल, हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। उनकी पार्टी JDU ने इस बार राज्यसभा सांसद के लिए उनका नाम नहीं दिया था। इस पर राष्ट्रपति ने खुद ही उनका मनोनयन किया। बिहार के CM नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सांसद की शपथ ली। हरिवंश को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था, लेकिन कुछ समय से दोनों के बीच दूरी नजर आई।

बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों का विदाई समारोह 18 मार्च को हुआ था। इस दौरान पीएम मोदी ने हरिवंश के लिए कहा था- “हमारे उपसभापति हरिवंश विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला।” पीएम मोदी ने हिंट दी थी कि हरिवंश की राजनैतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है, वे आगे भी जनहित में काम करते रहेंगे। इसके आधार पर ही यह माना जा रहा है हरिवंश नारायण को मनोनीत सांसद बनाकर दोबारा लाया गया है।

संविधान और राज्यसभा के नियमों के अनुसार, मनोनीत सांसद भी उपसभापति बन सकता है। संविधान के आर्टिकल 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है। इसमें कहीं भी यह शर्त नहीं है कि सदस्य निर्वाचित ही होना चाहिए, यानी मनोनीत और निर्वाचित, दोनों तरह के सदस्य इस पद पर चुने जा सकते हैं। बशर्ते वह व्यक्ति राज्यसभा सदस्य होना चाहिए।

उपसभापति का चुनाव राज्यसभा सांसद ही करते हैं। इसके लिए एक प्रस्ताव लाया जाता है, जिस पर वोटिंग होती है। सरकार और विपक्ष आपसी सहमति से नाम तय करते हैं। साधारण बहुमत से चुनाव हो जाता है। खास बात यह है कि मनोनीत सदस्य भी इस चुनाव में वोट डाल सकते हैं और खुद उम्मीदवार भी बन सकते हैं।

हरिवंश पहले ही राज्यसभा के उपसभापति (2018–2024) रह चुके हैं। अब वे राष्ट्रपति की तरफ से मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं। ऐसे में सहमति बनने पर हरिवंश दोबारा उपसभापति बन सकते हैं।