Health Care Tips: महिलाएं इन समस्याओं को भूल कर भी न करें नज़रअंदाज़, हो सकती है दिक्कत

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महिलाएं न सिर्फ अपनी जिंदगी के सभी रिश्तों को अच्छे से निभाती हैं बल्कि रोज़ मर्रा की जिंदगी में आने वाले कामों को भी बेहतरीन तरीके से करती हैं. महिलाओं की जिंदगी काफी ज़िम्मेदारियों से भरी हुई होती है और आजकल के समय में वह न सिर्फ अपनी प्रोफ़ेशनल लाइफ को संभाल रहीं हैं बल्कि परिवारों को भी संभालती हैं. इतनी साड़ी ज़िम्मेदारियों को संभालते संभालते वह खुद की परेशानियों को एक कोने में रख देती हैं. ऐसा महिलाओं की सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होता है. ऐसे में फीमेल बॉडी से जुडी भी ऐसी समस्याएं होती है जिनको नज़रअंदाज़ करना सही नहीं होता है. ऐसे ही कुछ समस्याओं के बारे में हम आपको बताने जा रहें हैं जिनको इग्नोर करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. चलिए जानते हैं.

अनियमित पीरियड्स- आजकल हमारी बिजी लाइफ स्टाइल की वजह से तनाव, हार्मोनअल समस्याओं के कारण अनियमित पीरियड्स का अनुभव कर सकते हैं. टॉनिक या फिर गोलियों के रूप में सप्लीमेंट्री लिए जा सकते हैं. इसमें अशोका, शतावरी और लोधरा जैसी प्राकृतिक जड़ी बूटियां शामिल होती है. यह जड़ी बूटियां हार्मोनल स्राव को नियमित करने में मदद करती है. यूट्रस की परत को शांत करती है और चक्रीय लय को ठीक करती है. साथ ही इस तरह महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े लक्षणों से राहत भी प्रदान करती है .

पीरियड्स में ऐंठन- कई महिलाओं को पीरियड के समय में ऐठन का अनुभव भी होता है. यह महिलाओं के लिए बहुत ही ज्यादा दर्दनाक नहीं होता है. लेकिन दूसरी तरफ कई महिलाओं के लिए उनकी दिन प्रतिदिन के कामों को प्रभावित करने के लिए यह काफी गंभीर हो सकता है. पीरियड्स में होने वाली इस असुविधा को कम करने के लिए यशतीमधु और दालचीनी जैसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों दी जाती है. इससे दर्द और यूट्रस की मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद मिलती है.

मानसिक और शारीरिक समस्या – क्लाइमेक्टेरिक वह चरण होता है जो रीप्रोडक्टिव से नॉन रिप्रोडक्टिव चरण में संक्रमण को चिन्हित करता है. सिर्फ पेरिमेनोपॉज मेनोपॉज और मेनोपॉज के बाद के चरणों को संदर्भित करता है. यह संक्रमण मानसिक और शारीरिक लक्षण को ला सकता है. इस चरण में मानसिक और शारीरिक तनाव हो सकता है. इस दौरान महिलाएं हर्बल समाधान की तलाश में जरूर करती है. आप अशोक, मुलेठी और शतावरी जैसी जड़ी बूटियों का सेवन कर सकती है. यह जड़ी बूटियां क्लाइमेक्टेरिक लक्षणों को कम करने में मदद करती है.

अगर आप हेल्दी रहना चाहती हैं और चाहती हैं कि यह सारी समस्याएं आपको नहीं हो तो ऐसे में अपने संतुलित आहार पर ध्यान जरूर दें. साथ ही साथ रोजाना 30 मिनट के लिए एक्सरसाइज करना बिल्कुल ना एस्केप करें. यह आपको मानसिक के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी हल्दी रखेगा.