भारत में इस साल गर्मी तोड़ेगी सारे रिकॉर्ड! आ रहा है ‘सुपर अल-नीनो’
अगर आपको लगता है कि इस बार की गर्मी पिछले साल के मुकाबले कम होगी, तो आप गलत हैं. अभी तो मार्च का महीना खत्म भी नहीं हुआ है और सूरज के तेवर तीखे होने लगे हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 इतिहास के सबसे गर्म सालों में से एक हो सकता है. इसके पीछे उन्होंने प्रशांत महासागर में बनने वाले ‘सुपर अल-नीनो’ को बताया है. इसका मतलब है कि भारत में इस बार न केवल गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है, बल्कि मॉनसून पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं. 13 मार्च 2026 को आई इस रिपोर्ट ने किसानों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है. आइए, बेहद सरल भाषा में समझते हैं कि यह ‘अल नीनो’ क्या बला है और यह आपकी रसोई से लेकर आपकी सेहत तक पर कैसे असर डालेगा?
सामान्य ‘अल नीनो’ के दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है. लेकिन जब यह तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा (करीब 2-2.5 डिग्री सेल्सियस) बढ़ जाता है, तो उसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है. इसके प्रभाव से भारत के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है. यह शक्तिशाली मौसमी बदलाव मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश में देरी या कमी होने की संभावना बढ़ जाती है.
इस नई ‘सुपर अल नीनो’ बला के कारण मार्च और अप्रैल के महीने से ही भारत के कई हिस्सों में पारा 45-48 डिग्री के पार जा सकता है. शहरों में ‘हीट आइलैंड’ का असर बढ़ेगा, जिससे रातें भी ठंडी नहीं होंगी. इससे पहले अल नीनो का सीधा संबंध भारत में कम बारिश से रहा है. अगर ‘सुपर अल नीनो’ आता है, तो मॉनसून में देरी हो सकती है या बारिश बहुत कम हो सकती है. कम बारिश का मतलब है फसलों की बर्बादी. इससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.
आमतौर पर अल नीनो हर कुछ सालों में आता है, लेकिन इस बार क्लाइमेट चेंज ने आग में घी का काम किया है. धरती का तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है, ऐसे में सुपर अल नीनो का आना लोगों पर डबल मार जैसा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2026 इतिहास का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है.
सुपर अल-नीनो केवल गर्मी नहीं लाता, बल्कि जल संकट भी खड़ा करता है. ऐसे में जलाशयों में पानी का स्तर गिर सकता है और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है. इसलिए वैज्ञानिक प्रशासन को अभी से ‘हीट एक्शन प्लान’ और जल प्रबंधन पर काम शुरू करने की सलाह दे रहे हैं.
