मस्जिदों में अगवा कर ले जाते हैं हिंदू बच्चियाँ और मुस्लिमों से करवा देते हैं निकाह, पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पर अदालत-पुलिस मौन

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ संगठित और सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। जहाँ नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया जाता है, जबरन धर्मांतरण कराया जाता है और फिर निकाह के लिए मजबूर किया जाता है। भील, मेघवार और कोल्ही जैसे बेहद गरीब और सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े हिंदू समुदायों की लड़कियों को निशाना बनाया जाता है क्योंकि ऐसे परिवार न तो लंबी कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं और न ही मीडिया या सत्ता के गलियारों तक उनकी पहुँच होती है। दरगाहों और मदरसों से जुड़े नेटवर्क के जरिए हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। पीर सरहिंदी दरगाह से जुड़े लोगों ने दावा किया है कि उनकी जगह पर अब तक करीब 1000 हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण किया जा चुका है।

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत ज्यादातर या तो सीधे अपहरण से होती है या फिर डर और दबाव के जरिए। नाबालिग लड़कियों को शादी, नौकरी या आर्थिक सुरक्षा जैसे झूठे सपने दिखाए जाते हैं। कई बार उन्हें धमकाया जाता है और मजबूरी में घर छोड़ने को कहा जाता है। इसके तुरंत बाद लड़कियों को उनके अपने जिले से बाहर ले जाया जाता है। यह जल्दी किया गया स्थानांतरण इसलिए बहुत जरूरी होता है ताकि लड़की का संपर्क अपने परिवार से टूट जाए, वह किसी वकील या सामाजिक कार्यकर्ता तक न पहुँच सके और स्थानीय मीडिया की नजर भी इस मामले से दूर रहे। धर्मांतरण आमतौर पर कुछ खास मस्जिदों, दरगाहों या मदरसों से जुड़े ठिकानों पर कराया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े नेटवर्क सक्रिय भूमिका निभाते हैं और सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाता है। इस तरीके का एक और गंभीर हिस्सा कागजात में हेरफेर है। फर्जी पहचान पत्र बनाए जाते हैं, जिनमें नाबालिग लड़कियों की उम्र बढ़ाकर उन्हें बालिग दिखाया जाता है।

इन बदले हुए दस्तावेजों का इस्तेमाल सिंध के बाल विवाह कानूनों से बचने के लिए किया जाता है। धर्मांतरण के सिर्फ तीन से चार दिन के भीतर ही लड़की की शादी करा दी जाती है, अक्सर किसी उम्रदराज व्यक्ति से या ऐसे आदमी से जिसकी पहले से शादी हो चुकी होती है। इस तरह पूरा मामला कानूनी दिखाने की कोशिश की जाती है जबकि असलियत में लड़की के पास कोई असली विकल्प नहीं होता है। अदालत की कार्यवाही इस समस्या को और गंभीर बना देती है। कई बार पीड़ित लड़कियों के बयान दबाव में दर्ज किए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद पुलिस और अदालतें अक्सर ‘स्वेच्छा से धर्मांतरण’ के दावों को बिना गहराई से जाँचे ही सही मान लेती हैं। एक बार अदालत धर्मांतरण को मान्यता दे देती है तो उस फैसले को पलटना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसके साथ ही पीड़िता और उसके परिवार के लिए कानूनी रास्ते लगभग बंद हो जाते हैं।

पाकिस्तान में ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जहाँ कानूनी खामियाँ हैं, सामाजिक कमजोरियाँ हैं और संस्थाएँ या तो उदासीनता हैं या कट्टरपंथी आरोपितों के पक्ष में ही खड़ी दिखती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि अल्पसंख्यक लड़कियाँ एक ऐसे चक्र में फँस जाती हैं, जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल होता है। इससे भी ज्यादा मुश्किल होता है इससे कानूनी रूप से चुनौती देना। ऐसे केसों की पाकिस्तान में भरमार है।

अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ही एक हैरान करने वाली खबर सामने आई थी जहाँ एक 15 साल की नाबालिग हिंदू लड़की का 7 बच्चों के अब्बू से निकाह करा दिया गया था। लड़की मूक-बधिर थी और इसे इस्लाम कबूल कराया जा चुका था। लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी मूक-बधिर बेटी कभी एक ड्रग तस्कर और 7 बच्चों के बाप से निकाह नहीं कर सकती है, उसे मजबूर किया गया है। पाकिस्तान में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले शिव कच्छी ने कहा कि पुलिस ने परिजनों की अपहरण की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। पाकिस्तान में कट्टरता का आलम ऐसा है कि हिंदू लड़कियों को पढ़ाई लिखाई करने के लिए भी स्कूलों के भीतर ही इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया जा रहा था। दिसंबर 2025 में सिंध प्रांत में स्थित मीरपुर सकरो के एक सरकारी हाई स्कूल से यह घटना सामने आई थी।

नवंबर के अंत में कुछ हिंदू छात्राओं के माता-पिता ने बताया की स्कूल की प्रिंसिपल ने उनकी बेटियों से पढ़ाई जारी रखने के लिए इस्लाम अपनाने को कहा था। अभिभावकों का यह भी कहना है कि छात्राओं को कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और उनके धर्म का मजाक उड़ाया गया। इंकार करने पर कुछ छात्राओं को स्कूल से घर भेज दिया गया। सिंध के हिंदुओं की स्थिति इतनी भयावह है कि लोग किसी भी सूरत में पाकिस्तान छोड़ना चाहते थे। भारत का वीजा नहीं मिलने के कारण हिंदू समुदाय के कई लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने का भी मामला सामने आया था। 2023 में सिंध में गड़िया लुहार सहायता कमेटी के चेयरमैन मांजी लुहार उर्फ काका ने बताया था कि पिछले छह माह में उनके चार परिचित हिंदुओं ने आत्महत्या कर ली।

सामाजिक कार्यकर्ता रोशन भील का कहना है कि ऐसा हर परिवार अतीत भूलना चाहता है, पर ऐसा होता नहीं है। पाकिस्तान में पिछले 12 सालों में 14,000 हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण और गैंगरेप की घटनाएँ सामने आई हैं।