पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई के लिए आंदोलन शुरू, इस्लामाबाद में धारा 144 लागू
पाकिस्तान में एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए बड़े पैमाने पर प्रोटेस्ट शुरू हो गए हैं। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का एक बड़ा मार्च खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की ओर जा रहा है। ये मार्च सरकार के साथ बातचीत नाकाम रहने के बाद निकाला गया है। वहीं, इस्लामाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। किसी को भी इस्लामाबाद में घुसने की इजाजत नहीं जाएगी। आसिम मुनीर की टेंशन बढ़ती जा रही है। सवाल ये है कि ये मार्च इस्लामाबाद पहुंच पाएगा या सरकार इसे बीच रास्ते में ही रोक लेगी?
इससे पहले सरकार के वार्ताकारों और इमरान खान की पार्टी के नेताओं के बीच बातचीत का दूसरा दौर शनिवार शाम 4 बजे शुरू हुआ और रातभर चला। यह बातचीत रविवार तड़के बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई।
PTI के समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से लॉन्ग मार्च शुरू किया। रविवार 4 अक्टूबर से ही शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में PTI समर्थक गांडी चौक पर जमा हुए और यहां से मार्च में शामिल हुए। हजारों लोग करीब 275 किमी दूर इस्लामाबाद की तरफ बढ़ रहे हैं। इमरान की पार्टी PTI के कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर धरपकड़ की गई। PTI का दावा है कि उसके लगभग 2 हजार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई है। वहीं, इस्लामाबाद में संसद और हाईवे की सुरक्षा बढ़ाते हुए कई रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने पिछले महीने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक मार्च निकालने की घोषणा की थी लेकिन बाद में शहबाज सरकार द्वारा विरोध-प्रदर्शन रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों के कारण इसे चार अक्टूबर तक टाल दिया था। इसकी वजह से पाकिस्तान की सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा है। PTI के नेताओं की मांग है कि उन्हें जेल में इमरान खान से मुलाकात करने दी जाए। इमरान के चैकअप के लिए प्राइवेट डॉक्टर की इजाजत मिले।
73 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने समेत 100 से ज्यादा मामले हैं। वह रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। 18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य को लेकर चिंता, खासकर उनकी आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्या के बाद, जांच और इलाज के लिए उन्हें इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल में भेजने का आदेश दिया था। सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी और बाद में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की।
