भारत रूसी कच्चा तेल खरीदता रहेगा, सरकार बोली- अमेरिकी प्रतिबंध बेअसर

अमेरिका की तरफ से मिलने वाली प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों से हमारे इम्पोर्ट प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस बीच वैश्विक सप्लाई संकट को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के जहाजों से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का अस्थायी लाइसेंस जारी कर दिया। अमेरिकी ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। बेसेंट के मुताबिक इससे अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा। यह सामान्य लाइसेंस कच्चे तेल के बाजार को स्थिर करने और ऊर्जा की दृष्टि से संवेदनशील देशों तक तेल की पहुंच सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

सुजाता शर्मा ने कहा कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ रहा है। भारत अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, छूट के दौरान भी खरीदा और आगे भी इसे जारी रखेगा। सरकार ने देश की जरूरत के मुताबिक पहले ही कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है, इसलिए देश में क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि भारत ने मई महीने में रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया।

दुनियाभर में तेल के दाम न बढ़ें और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य रहे, इसके लिए अमेरिका ने मार्च में भारत जैसे देशों को रूस से तेल खरीदने की एक विशेष छूट दी थी। पहले यह छूट 16 मई तक के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से अमेरिका लगातार भारत पर यह दबाव बना रहा है कि वह रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदना कम कर दे।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट कर दिया था कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच देश की तेल सप्लाई बनाए रखना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों ने चेतावनी भी दी थी कि अगर तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इससे देश में डोमेस्टिक कुकिंग गैस (LPG) जैसी जरूरी चीजों की किल्लत और महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर भारत के तेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

अमेरिकी छूट की डेडलाइन खत्म होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी तेज कर दी है। डेटा इंटेलिजेंस एजेंसी केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि पूरे मई महीने का औसत आयात भी करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन के आसपास रहने वाला है।