ईरान जंग के बीच कच्चा तेल लाने की पूरी है तैयारी! होर्मुज के आसपास भारत ने भेजे सात जहाज
पश्चिम एशिया में युद्ध बढ़ता जा रहा है जिसका सीधा और सबसे घातक असर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है. सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में भारत भी शामिल है. जैसे-जैसे होर्मुज स्ट्रेट पर रुकावट बनी हुई है, भारत न केवल अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर काम कर रहा है, बल्कि भविष्य की इमर्जेंसी हालातों के लिए भी तैयारी कर रहा है. इस योजना के तहत भारतीय नौसेना कई स्थानों पर अपनी तैनाती बढ़ा रही है. दस दिन पहले उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए दो टास्क फोर्स तैनात किए गए थे. अब भारतीय नौसेना अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में लगभग सात जहाजों और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट वेसल्स की तैनाती कर रही है. 2019 से चल रहे ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना के जहाज पहले से ही ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी में मौजूद हैं. इन तैनातियों का मकसद न केवल एलपीजी और ईंधन ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है, बल्कि भविष्य में किसी भी तैनाती के लिए फारस की खाड़ी के नजदीक रहना भी है.
कमोडोर रंजीत राय (सेवानिवृत्त) ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि इस संकट से भारत को बहुत बड़ा सबक मिला है. इसके बाद भारत कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. रंजीत राय के अनुसार, भारत की ऊर्जा जरूरतों का 45% हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद है जिससे यह सप्लाई लगभग रुकी हुई है और भारत के पास इसका कोई तात्कालिक विकल्प नहीं है. अब भारत के पास एक रास्ता ये है कि वो या तो पूरब से रूसी तेल खरीदे या फिर पश्चिम से वेनेजुएला और अमेरिका से समुद्री मार्ग के जरिए तेल-गैस ले. हालांकि इसकी लागत, खासकर परिवहन सहित, काफी ज्यादा होगी. खाड़ी से मिलने वाली ऊर्जा बहुत सस्ती होती है, जबकि वैकल्पिक स्रोतों की कीमत काफी अधिक होगी.
कमोडोर रंजीत राय के मुताबिक, सऊदी अरब के जेद्दा से तेल को जमीन के रास्ते ले जाकर फिर अदन की खाड़ी से भेजने का विकल्प भी तलाशा जा सकता है, लेकिन इसके लिए लॉजिस्टिक्स मजबूत होना चाहिए और हमें देखना पड़ेगा कि यह कितना व्यावहारिक होगा.
विशेषज्ञ के अनुसार, अगर हम ये रास्ता चुनते हैं तो तेल खरीद की लागत बढ़ना तय है. भारत को ऊर्जा सुरक्षा से निपटने की तैयारियों में क्षेत्र में भारतीय नौसेना की तैनाती बढ़ाना भी शामिल है क्योंकि तेल से भरे जहाज बंदरगाहों पर तो नहीं रुक सकते हैं. नौसेना को फारस की खाड़ी में बनी नई स्थिति के हिसाब से कार्रवाई करनी पड़ सकती है.
कमोडोर राय के अनुसार, युद्ध आगे कहां जाएगा, भविष्य में क्या होगा, इसका अनुमान लगा पाना कठिन है, इसलिए भारतीय नौसेना को हाई अलर्ट पर रहना होगा. न केवल ऊर्जा आपूर्ति वाले जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए, बल्कि अगर ईरान सुरक्षा का भरोसा देता है तो जरूरत पड़ने पर भविष्य में फारस की खाड़ी में प्रवेश करने के लिए भी नौसेना को तैयार रहना होगा. भारत तेहरान के साथ भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रहा है. इस बीच एलपीजी ले जा रहे तीन भारतीय जहाजों को पहले ही भारतीय नौसेना ने उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक एस्कॉर्ट किया है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 20 से अधिक भारतीय व्यापारिक जहाज अभी भी होर्मुज के पश्चिम में मौजूद हैं. ईरान में चल रहे संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सीमित हो गई है और भारत को एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना की मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट (MSD) के तहत 2019 से एक युद्धपोत तैनात था. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए नौसेना ने अपनी ताकत बढ़ा दी है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले युद्धपोतों की संख्या को एक से बढ़ाकर तीन किया गया था. अब क्षेत्र में नौसेना के युद्धपोतों की संख्या और बढ़ा दी गई है. इन युद्धपोतों का काम भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित क्षेत्र तक एस्कॉर्ट करना है.
मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत भारतीय नौसेना दुनिया के छह अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात है. 2017 से इन सभी क्षेत्रों में तैनाती जारी है.
मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत ओमान और अदन की खाड़ी के पास दो बड़े ऑपरेशन भी चल रहे हैं. ओमान की खाड़ी में ऑपरेशन संकल्प और अदन की खाड़ी में एंटी-पायरेसी ऑपरेशन.
ओमान और अदन के अलावा, 2017 में शुरू की गई ‘मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ पहल के तहत तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास है, जिसका मकसद केप ऑफ गुड होप के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री डकैती को रोकना है. चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास और छठी तैनाती बंगाल की खाड़ी में म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित है.
