भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी, PM बोले- भारतीय चिप की दुनियाभर में सप्लाई शुरू
सरकार भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की तैयारी में है। PM मोदी ने गुरुवार को दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें एडिशन का उद्घाटन किया। PM मोदी ने कहा कि एक तरफ भारत की इकोनॉमी बढ़ रही है, दूसरी तरफ दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है। भारत के प्लांट्स से निकलने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स अब देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचने लगी हैं। उन्होंने कहा,
सेमीकंडक्टर सेक्टर ऐसा नहीं है कि फैक्ट्री लगाई और काम पूरा हो गया। इसमें टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटी बनाने में दशकों लगते हैं। लेकिन भारत ने चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग कैपेबिलिटी पर एकसाथ काम किया और सफलता हासिल की है।
दरअसल, इस साल सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी और बढ़ती कीमतों का सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर दिखा है। एपल ने सितंबर 2026 में भारत में कुछ आईफोन मॉडल की कीमतें 41% तक बढ़ाईं। इसके साथ ही कार और ऑटोमोबाइल में भी सेमीकंडक्टर चिप की लगातार कमी बनी रही है।
पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें
सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज शुरू: भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज लॉन्च किया है। पहले फेज की वैल्यू करीब 70,400 करोड़ रुपए थी। दूसरे फेज के लिए 1.18 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है।
AI के लिए नई टेक्नोलॉजी पर जोर: कंपाउंड सेमीकंडक्टर के मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सिलिकॉन फोटोनिक्स को इकोसिस्टम में शामिल करना जरूरी है। ये सभी चीजें AI को सक्षम बनाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी हैं।
सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने पर फोकस: भारत सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है और इसके लिए कई रिफॉर्म किए गए हैं। उन्होंने इक्विपमेंट कंपनियों के नेताओं से इन अवसरों का फायदा उठाने की अपील की।
. विदेशी कंपनियों के लिए सहयोग के नए रास्ते: अब इंटरनेशनल कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन फर्म्स और OCI के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ सहयोग कर सकती हैं। सरकार पॉलिसी, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के स्तर पर जरूरी कदम उठा रही है।
सप्लाई चेन के लिए भारत की सफलता महत्वपूर्ण: जब भारत जैसा देश किसी बड़ी इंडस्ट्री में सफलता हासिल करता है, तो इससे पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती मिलती है। आज जब सप्लाई चेन को हथियार बनाया जा रहा है, इसका महत्व और बढ़ जाता है।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में ऊर्जा सुरक्षा भी जरूरी: AI के लिए बनाई जा रही चिप्स का इस्तेमाल AI डेटा सेंटर में हो रहा है। इनमें हजारों हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर एक साथ बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस करते हैं, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा भी अहम है।
युवाओं से भारत में रिसर्च से जुड़ने की अपील: मोदी ने भारत में रिसर्च कर रहे युवाओं से आगे आने और विदेशों में रिसर्च कर रहे युवाओं से भारत में एडवांस टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़ने की अपील की।
उद्योगों से देश में R&D बढ़ाने को कहा: पीएम ने इंडस्ट्री लीडर्स से भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे उद्योग को फायदा होगा और देश की युवा शक्ति को भी मजबूती मिलेगी।
भारत में चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा बनाने पर जोर: भारत में फैबलेस कंपनियां बढ़ें और चिप से जुड़ी बौद्धिक संपदा भी यहीं तैयार हो। कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स पर भी आगे बढ़ने की जरूरत है।
‘टेप-आउट’ के बाद अगली चिप पर काम शुरू: डिजाइन पूरा होने के बाद चिप को उत्पादन के लिए भेजने को ‘टेप-आउट’ कहा जाता है। लेकिन इसके बाद काम खत्म नहीं होता, बल्कि अगली बेहतर चिप बनाने का काम उसी दिन शुरू हो जाता है।
17 से 19 सितंबर तक चलने वाले सेमीकॉन इंडिया 2026 की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण’ है। इसमें सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप, शिक्षाविद और छात्र शामिल होंगे।
खास आकर्षण ‘सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ होगा, जहां चिप बनने से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक का पूरा प्रोसेस दिखाया जाएगा।
इस बार 600 से ज्यादा प्रदर्शक, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं, हिस्सा ले रहे हैं। 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
एएसएमएल, एप्लाइड मैटेरियल्स, टेराडाइन, इन्फिनियन, एनएक्सपी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रॉन, लैम रिसर्च, सीजी पावर, एडवांटेस्ट और टोक्यो इलेक्ट्रॉन जैसी कंपनियां यहां निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और कारोबारी साझेदारी पर चर्चा करेंगी।
प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन होंगे। इसके अलावा कई भारतीय राज्यों के पवेलियन भी लगाए जाएंगे।
देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अब तक 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इनमें से पहले चरण में मंजूर तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
केंद्र ने सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका फोकस देश में सेमीकंडक्टर से जुड़े इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने पर है।
