दिल्ली में 1000 साल पहले बना था भारत का पहला ‘स्मार्ट’ बांध? इंजीनियरिंग देख हो जाएंगे हैरान
दिल्ली के शोर-शराबे और कंक्रीट के जंगलों के बीच एक ऐसा रहस्य छिपा है, जो हमें 1,000 साल पीछे उस दौर में ले जाता है, जब भारत के पास अपना ‘स्मार्ट वॉटर सिस्टम’ था. फरीदाबाद और दिल्ली की सीमा पर स्थित अनंगपुर बांध (Anangpur Dam) आज भी मजबूती से खड़ा है और आधुनिक इंजीनियरों को चुनौती दे रहा है. जब हम ‘स्मार्ट सिटी’ की बात करते हैं, तो हमें लगता है कि यह कोई मॉडर्न टेक्नोलॉजी से बना शहर होगा. लेकिन दिल्ली के पास फरीदाबाद की सीमा पर एक ऐसा ढांचा खड़ा है, जिसने आज से 1,000 साल पहले ही ‘स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट’ का नमूना पेश कर दिया था. हम बात कर रहे हैं अनंगपुर बांध (Anangpur Dam) की. पुरातत्वविदों (Archaeologists) और इतिहासकारों के लिए यह बांध किसी कुदरती और शानदार इंजीनियरिंग से कम नहीं है. इसने सदियों तक दिल्ली की प्यास बुझाई है. आज जब दिल्ली हर साल पानी की किल्लत और बाढ़ से जूझती है, तब सूरजकुंड के पास स्थित अनंगपुर बांध की कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है.
इस बांध को देखकर वैज्ञानिक और इतिहासकार हैरान हैं कि बिना सीमेंट और किसी मॉडर्न क्रेन के इसे इतना मजबूत कैसे बनाया गया होगा. यह बांध अपनी बनावट और वजन के कारण पानी के दबाव को रोकता है. इसमें स्थानीय क्वार्टजाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. इसको बनाने में पत्थरों को इस तरह से एक-दूसरे में फंसाया गया है कि वे बिना किसी मॉडर्न मसाले के कई सालों से हिले तक नहीं हैं. बांध के पीछे की तरफ सीढ़ियां बनी हैं, जो पानी की गति को कम करने का काम करती थीं. यह तकनीक आज के आधुनिक स्पिलवे जैसी ही है. बांध के जरिए जो पानी जमा होता था, वह अरावली की पहाड़ियों से छनकर आता था, जिससे दिल्ली को शुद्ध पीने का पानी मिलता था.
इस अनंगपुर बांध का मुख्य उद्देश्य अरावली की पहाड़ियों से आने वाले मानसूनी पानी को रोकना था. यह पहाड़ियों से नीचे आने वाले पानी की रफ्तार को कम कर देता था, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ नहीं आती थी. बांध के पीछे रुकने वाला पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता था, जिससे आसपास के कुओं और बावड़ियों का जलस्तर हमेशा बना रहता था. यहां रुके हुए पानी का इस्तेमाल खेती के लिए भी किया जाता था, जो उस दौर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाती थी.
आज जब हम हर साल दिल्ली को पानी की किल्लत और बाढ़ से जूझते देखते हैं, तो अनंगपुर बांध एक समाधान की तरह दिखता है. यह नेचुरल ड्रेनेज तोमर राजाओं ने प्रकृति के रास्तों को ब्लॉक करने के बजाय उन्हें ‘मैनेज’ करने के लिए बनाया था. आज यह ऐतिहासिक धरोहर झाड़ियों और अतिक्रमण के बीच खो रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ऐसे पुराने सिस्टम को दोबारा जीवित किया जाए, तो दिल्ली एनसीआर का गिरता ग्राउंडवॉटर लेवल सुधारा जा सकता है.
इतिहासकारों का मानना है कि इस बांध का निर्माण तोमर वंश के राजा अनंगपाल तोमर के शासनकाल के दौरान हुआ था. क्योंकि अरावली की पहाड़ियों से आने वाले मानसून के पानी को रोकना और उसे दिल्ली (उस समय की लाल कोट) की ओर मोड़ना था. यह बांध केवल पानी रोकने के लिए नहीं, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए बनाया गया था.
