‘झूठ की गूंज से भरमाने वाले हर चौराहे पर, भारत का युवा सच की हुंकार से चलता है’, Gen-Z के बीच बोले PM मोदी
गुजरात के वडोदरा में Gen-Z से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने युवाओं को देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि भारत का नौजवान सच के साथ आगे बढ़ता है. उन्होंने कहा, ‘झूठ की गूंज से भरमाने वाले हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है.’ पीएम मोदी ने इस दौरान रेलवे, मैन्युफैक्चरिंग, AI, स्किल और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी बात की.
वडोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के मैदान में हुए कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 6 हजार युवा प्रोफेशनल शामिल हुए. पीएम मोदी ने वडोदरा के लोगों की स्वच्छता मुहिम की तारीफ की. उन्होंने कहा कि शहर ने विकास पर्व के मौके पर जिस तरह स्वच्छता के साथ स्वागत अभियान चलाया, वह सराहनीय है. वहीं, विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो आसान होने के साथ तेज भी हो. इसी क्रम में उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को देश की बदलती काम करने की संस्कृति का उदाहरण बताया. उनके मुताबिक, 2,800 किलोमीटर से ज्यादा लंबा इस कॉरिडोर का काम पूरा हो चुका है.
इस दौरान प्रधानमंत्री ने पुरानी सरकारों की कार्यशैली पर भी निशाना साधा. उन्होंने बताया कि फ्रेट कॉरिडोर का विचार 2004 में सामने आया था. इसके लिए 2006 में बाकायदा कंपनी भी बनाई गई, लेकिन 2014 तक यह प्रोजेक्ट फाइलों में ही उलझा रहा.
पुरानी लेटलतीफी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि इन जरूरी फाइलों के लिए भी कोई सीधा रास्ता नहीं था. वे बस अटकती, लटकती और भटकती रहीं. इसका नतीजा यह रहा कि सात-आठ साल में एक किलोमीटर ट्रैक भी तैयार नहीं हो सका. 2014 के बाद इस काम को तेजी से आगे बढ़ाया गया. आज 2,800 किलोमीटर से ज्यादा लंबा फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क तैयार है. जो कि पूर्वी और पश्चिमी गलियारे अब देश में माल ढुलाई और कारोबार की रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि पहले जिस पटरी पर मुसाफिरों की गाड़ियां दौड़ती थीं, उसी पर मालगाड़ी भी चलती थी. इस वजह से सफर और सामान की ढुलाई दोनों बहुत सुस्त पड़ जाते थे. नए फ्रेट कॉरिडोर ने इस पूरी व्यवस्था को बदलकर रख दिया है. अब पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर हर रोज 430 से अधिक मालगाड़ियां तेजी से निकल रही हैं. पहले जिसे 100 किलोमीटर तय करने में करीब साढ़े छह घंटे लग जाते थे, वही दूरी अब आधे से भी कम वक्त में पूरी हो रही है.
इस तेज रफ्तार का लाभ कारोबारियों के साथ किसानों की जेब तक पहुंच रहा है. फल, फूल और हरी सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज अब बिना देरी बड़े बाजारों की मंडियों तक पहुंच रही है. इससे किसानों का नुकसान बचा है, साथ ही समय, ईंधन और माल ढुलाई के खर्च में भी बड़ी बचत हो रही है.
