ईरान ने कुवैत पर फिर किया हमला, सीजफायर के बीच मिसाइल और ड्रोन दागे
ईरान ने सोमवार, 1 जून को सुबह-सुबह कुवैत पर हमला कर दिया है. कुवैत की सेना ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन की ओर से आए मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोक दिया है. इस दौरान पूरे देश में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे. दूसरी तरफ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कहा है कि उन्होंने ईरानी क्षेत्र पर हमला करने के लिए अमेरिका की सेना द्वारा इस्तेमाल किए गए बेस को निशाना बनाया है.
कुवैत सेना ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा, “हम लोगों को सूचित करना चाहते हैं कि जो धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे हमारी वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा इन दुश्मन हमलों को रोकने की कार्रवाई का परिणाम हैं.” सरकारी समाचार एजेंसी कुना के अनुसार, पूरे खाड़ी देश कुवैत में हवाई हमले के सायरन बजे हैं. यह घटना ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) लागू है.
इससे पहले 28 मई को भी कुवैत पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया था. तब बंदर अब्बास में अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने कुवैत में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया था. पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार बदल रही है. कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी कुना ने बताया है कि कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बातचीत की है. इस बातचीत के दौरान क्षेत्र में चल रही ताजा घटनाओं और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई.
एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कई महीनों तक चली खुदाई और मरम्मत के बाद अपने अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों के बड़े हिस्से तक फिर से पहुंच हासिल कर ली है. जंग में अमेरिका-इजरायल ने ईरान के 18 अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया था और उनके 69 सुरंग प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया था. लेकिन अब इनमें से 50 को ईरान फिर से खोल चुका है.
अगर अमेरिका-ईरान शांति डील की बात करें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में कुछ और बदलाव करने की मांग की है. सीबीएस न्यूज के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य सीजफायर को लंबे समय तक बनाए रखना है. रिपोर्टों के मुताबिक, नए मसौदे में 60 दिनों तक संघर्ष रोकने का प्रस्ताव, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के उपाय और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने की रूपरेखा शामिल है.
हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक समझौते की घोषणा नहीं की गई है. बता दें कि शुक्रवार को व्हाइट हाउस में इस मुद्दे पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसका उद्देश्य अंतिम फैसला लेना था. लेकिन बैठक में ट्रंप कोई फैसला नहीं ले पाए. ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना किसी भी संभावित समझौते का एक मुख्य और महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा.
