अमेरिका के लिए ‘बाली’ बना ईरान, THAAD-पैट्रियट की खींच ली ताकत, 38 अरब डॉलर फुंके

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध 8 महीने से ज्यादा खिंच चुका है और इससे नुकसान दोनों ही पक्षों को पहुंचा है. कहां डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे थे कि सिर्फ चार हफ्तों की बात है, वहीं ईरान ने उसे न सिर्फ मिसाइलों से चौंकाया बल्कि वो सारे इंतजाम किए, जिससे अमेरिका के हथियारों के गोदाम खाली हो रहे हैं और खजाने में भी कंगाली छा रही है. ये जानकारी कांग्रेशनल बजट ऑफिस की रिपोर्ट में दी गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष की कीमत अब सामने आने लगी है.

अमेरिकी कांग्रेस की गैर दलीय संस्था CBO (Congressional Budget Office) की नई रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध में अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन को 1 अगस्त तक करीब 38 अरब डॉलर खर्च करने पड़े हैं. खास बात ये है कि युद्ध की कीमत केवल पैसों तक सीमित नहीं है. संघर्ष के दौरान अमेरिका ने बड़ी संख्या में एंटी मिसाइल हथियारों का इस्तेमाल किया है. इससे भविष्य में चीन के साथ संभावित युद्ध की स्थिति में अमेरिकी सेना के सामने हथियारों की उपलब्धता को लेकर चुनौती बढ़ सकती है.

CBO की रिपोर्ट बताती है कि अगर ईरान के साथ सैन्य संघर्ष आगे भी जारी रहता है तो अमेरिका को हर महीने करीब 2 से 3 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं. अगर लड़ाई अपेक्षाकृत कम स्तर पर रहती है तो मासिक खर्च लगभग 2 अरब डॉलर हो सकता है. वहीं अगर युद्ध की तीव्रता जुलाई जैसी बनी रहती है तो यह खर्च 3 अरब डॉलर या उससे भी ज्यादा पहुंच सकता है. इस खर्च में इस्तेमाल किए गए हथियारों और सैन्य उपकरणों को दोबारा खरीदना, सैन्य विमानों की ज्यादा उड़ानें, ऑपरेशन और बढ़ी हुई ईंधन लागत शामिल हैं.

अमेरिका के लिए इस्तेमाल किए गए इंटरसेप्टर को दोबारा बनाना आसान नहीं होगा. CBO के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने के बावजूद पुराने स्तर का भंडार वापस तैयार करने में कम से कम पांच साल लग सकते हैं. डिफेंस सेक्टर में नए ऑर्डर से लेकर हथियारों की डिलीवरी तक कम से कम तीन से पांच साल का वक्त लग जाता है. ऐसे में युद्ध खत्म होने के बाद भी इसका असर अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर लंबे समय तक रह सकता है. खासतौर पर अगर वो किसी नए युद्ध में जाने की स्थिति में हो. सीधे-सीधे कहें कि चीन की ओर से किसी भी हमले को झेलने की हालत में अमेरिका इस वक्त नहीं है क्योंकि उसके हथियारों के भंडार में ईरान ने सेंध लगा दी और उसे खासा नुकसान पहुंचाया है.

युद्ध का असर केवल पेंटागन के बजट तक सीमित रहने की आशंका नहीं है. तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आने से ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है. CBO का अनुमान कहता है कि साल 2027 की पहली तिमाही में अमेरिका की महंगाई दर फरवरी में लगाए गए अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक हो सकती है. हालांकि CBO के आंकड़े पूरी तरह सही नहीं बताए जा सकते क्योंकि अमेरिका का रक्षा विभाग चीजें पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं करता और ये रिपोर्ट रिपोर्ट सरकारी डेटाबेस और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर बनाई गई है. हो सकता है कि युद्ध में 38 अरब डॉलर से भी ज्यादा का नुकसान हुआ हो, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा.