IRCTC Scam: लालू-राबड़ी-तेजस्वी पहुंचे दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट, आज पढ़े जाएंगे आरोप; फिर चलेगा ट्रायल
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे हैं। आज IRCTC होटल घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम सुनवाई होनी है। लालू-राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल 9 आरोपी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हो रहे हैं। विशेष अदालत में आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप पढ़े जाने जाएंगे।
कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे ट्रायल की प्रक्रिया बढ़ेगी। इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने ही 10 सितंबर 2026 को लालू, तेजस्वी, राबड़ी समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। वहीं, कोर्ट ने 7 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस मामले ED 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
आज की सुनवाई में अदालत आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को औपचारिक रूप से पढ़कर सुनाएगी। इस प्रक्रिया में आरोपियों से यह भी पूछा जाता है कि वे लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हैं या नहीं।
अगर आरोपी आरोपों से इनकार करते हैं, तो मामले में आगे नियमित ट्रायल की प्रक्रिया चलेगी। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह पेश किए जाएंगे और दस्तावेजी और अन्य सबूत अदालत के सामने रखे जाएंगे। इसके बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने कहा, ‘IRCTC मामले में अदालत ने लालू परिवार समेत तेजस्वी यादव पर आरोप तय करने का आदेश दिया है।
अब तेजस्वी जी को बताना होगा कि जिस दौर में उनके परिवार पर सत्ता के दुरुपयोग और जमीन के लेन-देन जैसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं, उस दौर की राजनीति को वे कैसे सही ठहराएंगे?’
उन्होंने आगे कहा, ‘नई पीढ़ी की राजनीति का दावा करने वाले तेजस्वी जी को पुराने सवालों से भागने के बजाय उनका जवाब देना चाहिए।’
ये मामला लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी के BNR होटलों के संचालन के ठेके से जुड़ा है। CBI का आरोप है कि इन दोनों होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका प्राइवेट कंपनी सुजाता होटल्स को देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं की गईं। एजेंसी के अनुसार, इस कथित लाभ के बदले पटना में जमीन का लेन-देन हुआ।
जांच एजेंसियों के मुताबिक होटल टेंडर और पटना की जमीन के बीच कथित लेन-देन इस केस का सबसे अहम हिस्सा है। CBI ने आरोप लगाया कि पटना की बेशकीमती जमीन पहले एक कंपनी के जरिए खरीदी गई, बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा। एजेंसी ने जमीन की कीमत और जिस कीमत पर सौदा हुआ, उसमें बड़े अंतर का भी आरोप लगाया है। यही कथित लेन-देन बाद में ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बना।
इस मामले की जड़ें 2004-05 के दौर में हैं। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। मार्च 2004 में रेलवे के दो होटलों के प्रबंधन से संबंधित प्रक्रिया IRCTC को सौंपी गई थी। मई 2004 में लालू रेल मंत्री बने। इसके बाद होटल संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी। CBI के मुताबिक 2005-06 में टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया
कई सालों बाद ये मामला 2017 में फिर सामने आया। जुलाई 2017 में CBI ने FIR दर्ज की। एजेंसी ने लालू यादव और अन्य पर पद के कथित दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और होटल टेंडर में अनियमितता के आरोप लगाए। इसके बाद CBI ने जांच आगे बढ़ाई और अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की. इसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।
CBI की FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। अगस्त 2018 में ED ने PMLA के तहत लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। यहीं से ये मामला सिर्फ कथित भ्रष्टाचार या टेंडर विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग केस के रूप में भी अदालत पहुंच गया।
लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। CBI ने कहा कि जांच में कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए हैं, जो आरोपों को मजबूत करते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं की गईं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
