दुनिया ने माना ISRO का लोहा! अब फ्रांस के सैटेलाइट उड़ाएगा भारत
भारत के अंतरिक्ष अभियान अब केवल चांद और मंगल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत दुनिया का ‘इंटरनेट हब’ बनने की दिशा में एक और बड़ी छलांग लगा चुका है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी सैटेलाइट दिग्गज Eutelsat के बीच हुए एक नए समझौते ने वैश्विक सैटेलाइट इंटरनेट की जंग में भारत की स्थिति को और मजबूत कर दिया है. अंतरिक्ष की दुनिया में अब भारत भी एक बड़ा प्लेयर बनकर तेजी से उभर रहा है. दिनोंदिन भारत की साख (Reputation) लगातार बढ़ रही है. जहां एक तरफ पूरी दुनिया की नजरें नासा के ‘आर्टेमिस-2’ पर हैं, वहीं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और बड़ा धमाका कर दिया है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अब सिर्फ रॉकेट लॉन्च करने वाली संस्था नहीं रही, बल्कि वह दुनिया का एक भरोसेमंद स्पेस पार्टनर बन चुकी है. यूरोपीय सैटेलाइट दिग्गज Eutelsat Group ने अपने ‘OneWeb’ सैटेलाइट इंटरनेट समूह को और मजबूत करने के लिए इसरो के साथ एक नया कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. यह समझौता साबित करता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उपजे वैश्विक संकट में अब भारत दुनिया के लिए सबसे सुरक्षित और किफायती लॉन्च पार्टनर बनकर उभरा है. इसके बाद अब भारत ग्लोबल सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में एलन मस्क (Starlink) को कड़ी टक्कर देने जा रहा है.
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) की तरह ही वनवेब भी अंतरिक्ष से पूरी दुनिया में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना चाहता है. इसके लिए उन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में सैकड़ों छोटे सैटेलाइट्स का एक जाल बिछाना है. इसके लिए उन्होंने इसरो का साथ लिया है. अब इसरो अपने सबसे भारी रॉकेट LVM3 (जिसे पहले GSLV Mk-III कहा जाता था) के जरिए इन सैटेलाइट्स को स्पेस में सही ऑर्बिट में पहुंचाएगा. वनवेब (जिसमें भारत के सुनील भारती मित्तल की बड़ी हिस्सेदारी है) और Eutelsat की यह डील सीधे तौर पर स्पेसएक्स (SpaceX) के एकाधिकार को चुनौती दे रही है. क्योंकि अभी तक ‘स्पेस इंटरनेट’ के मामले में एलन मस्क की कंपनी सबसे आगे है. ऐसे में इसरो के साथ इस लॉन्चिंग में कंपनी को कम बजट में ज्यादा फायदा मिल रहा है. इसरो के LVM3 रॉकेट का ट्रैक रिकॉर्ड अब तक 100% सफल रहा है, जो वनवेब जैसे कमर्शियल क्लाइंट्स के लिए सबसे जरूरी है. यही कारण है कि यूरोपीय सैटेलाइट दिग्गज Eutelsat Group ने इसके लिए ISRO के साथ डील की है.
इस डील से भारत को करोड़ों डॉलर का फायदा होगा. रूस के सोयुज रॉकेट पर पाबंदी के बाद, दुनिया की बड़ी कंपनियां अब चीन के बजाय भारत पर भरोसा जता रही हैं. वनवेब के सक्रिय होने से भारत के सुदूर गांवों, पहाड़ों और रेगिस्तानों में भी फाइबर केबल बिछाए बिना हाई-स्पीड इंटरनेट मिल सकेगा.
आने वाले महीनों में इसरो कई और विदेशी कंपनियों के पेलोड्स लॉन्च करने की कतार में है. यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ अपने सैटेलाइट्स लॉन्च नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया का ‘स्पेस ट्रांसपोर्टर’ बन चुका है. LVM3 रॉकेट की सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत अब भारी-भरकम सैटेलाइट्स के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं है. इस डील से मिलने वाला पैसा भारत अपने आगे आने वाले गगनयान और मून मिशन में इस्तेमाल करेगा.
