जग्गी हत्याकांड मामला : अमित जोगी को बड़ा झटका, तीन हफ्ते में करना होगा सरेंडर, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व CM अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने अमित जोगी को 3 हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई, जिस पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस मामले में सीबीआई ने 11000 पन्ने की जांच रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी चार्ज लगा है। कोर्ट ने पहले अमित जोगी को इस केस में बरी कर दिया था, लेकिन केस दोबारा ओपन किया गया। दरअसल पहले सीबीआई ने इस हत्याकांड में अमित जोगी के साथ ही 29 लोगों को आरोपी बनाया था। उनमें से 28 को सजा मिली और 1 अभियुक्त अमित जोगी बाइज्जत बरी कर दिए गए थे। ऐसे में अब दोबारा केस खुलने के बाद सीबीआई की 11000 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हुई है।

डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके।

हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, लेकिन अब केस रिओपन होने के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि अमित जोगी को जमानत लेनी होगी।

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।

हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।