4 या 5 अगस्त, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? यहां दूर करें तिथि का कंफ्यूजन
जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था. यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, भगवान कृष्ण का श्रृंगार करते हैं, उन्हें झूला झुलाते हैं और माखन-मिश्री, पंजीरी व अन्य भोग अर्पित करते हैं. मंदिरों और घरों में रात 12 बजे विशेष पूजा और आरती के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है. वहीं, हर बार की तरह इस बार भी लोगों में कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर बहुत बड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है. तो पंडित से जानते हैं कि जन्माष्टमी किस तिथि को मनाना शुभ रहेगा.
इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा. पंडित के मुताबिक, इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. वहीं, वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग 5 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, आरती, झूला झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है.
जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं. इसके अलावा, दही-हांडी का उत्सव 5 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा.
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 तिथि
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर होगा.
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पूजा का मुहूर्त
कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा निशीथ काल में की जाती है. इस दिन निशीथ पूजा का समय रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 5 सितंबर को अर्धरात्रि 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ 4 सितंबर को अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट से लेकर 4 सितंबर की रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा.
जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को लगाएं ये भोग
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का कृष्ण भक्तों के लिए विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान को फल, माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जा सकता है. घर के मंदिर को फूलों और अन्य सजावटी चीजों से सजाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को नए वस्त्र पहनाकर उनका सुंदर श्रृंगार किया जाता है.
जिन लोगों के घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, वे उनके मुकुट, बांसुरी, वस्त्र और आभूषणों से विशेष श्रृंगार कर सकते हैं. वहीं, अगर आपके घर में लड्डू गोपाल नहीं हैं, तो आप किसी श्रीकृष्ण मंदिर में जाकर भगवान को बांसुरी, मोरपंख, फल या अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं. तुलसी दल, माखन-मिश्री और अन्य सात्विक भोग भी भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय माने जाते हैं.
जन्माष्टमी की रात निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस समय भगवान की पूजा-अर्चना, आरती और मंत्र जाप किया जा सकता है. श्रद्धा के अनुसार ऊं क्लीं कृष्णाय नमः मंत्र का जाप भी किया जाता है.
आप भगवान श्रीकृष्ण को झूला झुला सकते हैं और अपनी मनोकामनाएं उनके सामने रख सकते हैं. अगर जीवन में किसी परेशानी या कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं, तो अपनी चिंताओं और मन की बात को कागज पर लिखकर भगवान के चरणों में समर्पित कर सकते हैं. इसे आस्था और मन की शांति से जुड़ी एक व्यक्तिगत साधना के रूप में किया जा सकता है.
जन्माष्टमी पर पढ़ें श्रीमद्भगवद्गीता
जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करना भी विशेष माना जाता है. इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया जा सकता है. भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं व्यक्ति को अपने कर्मों पर ध्यान देने और जीवन की परिस्थितियों का धैर्य के साथ सामना करने की प्रेरणा देती हैं.
श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेम, मित्रता, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है. उनका जीवन यह संदेश भी देता है कि व्यक्ति को अन्याय के सामने चुप रहने के बजाय धर्म और सत्य का साथ देना चाहिए.
जन्माष्टमी पर कई भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं. कुछ लोग केवल फल, दूध और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं. रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा और आरती की जाती है.
इस दौरान पूरी रात जागकर भगवान श्रीकृष्ण के भजन, कीर्तन और आराधना करने की भी परंपरा है. हालांकि, व्रत का तरीका व्यक्ति की सेहत और क्षमता के अनुसार ही अपनाना चाहिए.
पंजीरी का भोग भी है खास
जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का भोग भी लगाया जाता है. इसे बनाने के लिए साबुत धनिया को पीसकर उसका पाउडर तैयार किया जाता है. इसमें बूरा या मिश्री और अपनी पसंद के ड्राई फ्रूट्स मिलाए जा सकते हैं. कुछ लोग इसमें देसी घी भी डालते हैं. भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटा जा सकता है.
करें लड्डू गोपाल का सुंदर श्रृंगार
अगर आपके घर में लड्डू गोपाल हैं, तो जन्माष्टमी के दिन उनका विशेष श्रृंगार किया जा सकता है. उनके लिए नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और फूलों की माला का उपयोग किया जा सकता है. झूले को फूलों और अन्य सजावटी वस्तुओं से सजाकर लड्डू गोपाल को उसमें विराजमान किया जाता है.
पंचामृत से स्नान कराने और पूजा करने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है. अगर आपको किसी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की सेवा या श्रृंगार करने का अवसर मिलता है, तो श्रद्धापूर्वक इसमें भाग ले सकते हैं.
मंदिर जाएं और कृष्ण भक्ति में डूब जाएं
जन्माष्टमी के दिन अपने नजदीकी श्रीकृष्ण मंदिर जाकर भगवान के दर्शन किए जा सकते हैं. रात के समय मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव का आयोजन होता है. भक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव उसी खुशी और प्रेम के साथ मनाते हैं, जैसे किसी घर में नए बच्चे के जन्म का उत्सव मनाया जाता है.
अगर संभव हो तो इस दिन वृंदावन, मथुरा या किसी कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना की जा सकती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की सच्चे मन से भक्ति करने और उनकी सेवा में समय बिताने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
