‘मैं हूं किशोर कुमार खंडवा वाला..’ पूरा नहीं हुआ घर लौटने का सपना, 97वें जन्मदिन पर बोले गांव वाले
खंडवा वो शहर जिसने दुनिया को एक ऐसी आवाज दी. जो कभी बूढ़ी नहीं होती. ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘रूप तेरा मस्ताना’ और ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ जैसे सदाबहार गीतों के जादूगर किशोर कुमार. आज 4 अगस्त को उनका 97वां जन्मदिन है. पूरा खंडवा तीन दिन तक खंडवा गौरव दिवस मना रहा है. लेकिन, इसी शहर में उनका पुश्तैनी घर आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. भारत रत्न की मांग वर्षों से अधूरी है. पैतृक मकान को स्मारक बनाने का फैसला भी अधर में है और खंडवा लौटकर बसने का उनका सपना भी कभी पूरा नहीं हो सका.
आज बॉलीवुड के महान गायक किशोर कुमार का 97वां जन्मदिन है. गायकी अभिनय, संगीत निर्देशन, फिल्म निर्माण और निर्देशन, शायद ही कोई कला हो जिसमें किशोर कुमार ने अपनी पहचान न बनाई हो. मध्यप्रदेश सरकार उनके जन्मदिन को ‘खंडवा गौरव दिवस’ के रूप में मना रही है. समाधि पर एक दिन पहले से ही किशोर प्रेमियों का तांता लगा है. दूध-जलेबी का भोग लगाया जा रहा है, उनके गीत गूंज रहे हैं और हर कोई अपने अंदाज में उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. खंडवा के बॉम्बे बाजार स्थित गांगुली हाउस में 4 अगस्त 1929 को उनका जन्म हुआ था. वकील कुंजीलाल गांगुली के घर जन्मे आभास कुमार गांगुली आगे चलकर दुनिया के लिए किशोर कुमार बन गए.
सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने कभी अपनी मिट्टी नहीं छोड़ी. हर मंच से वे गर्व से कहते थे. ‘मैं हूं किशोर कुमार खंडवा वाला.’ यही वजह थी कि जिंदगी के आखिरी दिनों में भी उनकी ख्वाहिश मुंबई नहीं बल्कि खंडवा लौटकर बसने की थी.
यही वो घर है जहां कभी किशोर दा की हंसी गूंजती थी. आज इस मकान की देखभाल करते हैं सीताराम काका. उनके पास यादों का ऐसा खजाना है जो किसी किताब में नहीं मिलेगा. काका बताते हैं किशोर दा जब भी खंडवा आते तो घंटों यहीं बैठते, दोस्तों से मिलते, पुरानी गलियों में घूमते और कहते थे “एक दिन यहीं वापस आऊंगा.” लेकिन, वक्त ने उन्हें वह मौका नहीं दिया. आज उनका पुश्तैनी घर जर्जर हो चुका है. सरकार और परिवार के बीच वर्षों से इसे स्मारक बनाने की चर्चा होती रही लेकिन फैसला आज भी अधूरा है. खंडवा के लोग चाहते हैं कि यह मकान सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि संगीत प्रेमियों के लिए एक तीर्थ बन जाए.
