हजारों फीट ऊंचाई पर बहती है ‘कंकालों की झील’.. उत्तराखंड में बसी है दुनिया की ये सबसे रहस्यमयी जगह!

उत्तराखंड के नैनीताल को झीलों का शहर कहा जाता है. यहां एक दो नहीं बल्कि सात झीलें हैं. चारों ओर पहाड़ों से घिरे इस शहर की खूबसूरती भी यहां के झील बढ़ाते हैं. यही वजह है कि लोग यहां झील देखने आते हैं. उत्तराखंड में ही ‘कंकालों’ की झील भी है. उत्तराखंड का रूपकुंड समुद्र तल से करीब 16500 फीट की ऊंचाई पर है. इसी को कंकालों की झील भी कहते हैं. साल भर यह झील बर्फ से जमी रहती है. जैसे ही गर्मी शुरू होती है यह पिघलने लगती है. गर्मी के मौसम में जैसे ही यहां बर्फ पिघलती है तो सैकड़ों मानव कंकाल पानी में या सतह के नीचे तैरते दिखाई देते हैं. शुरू में लगा कि यह अवशेष जापानी सैनिकों के हो सकते हैं, जो यहां घुस आए थे.

हालांकि जब अंग्रेजों ने टीम भेजकर पता लगाने को कहा तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ. जांच में पता चला कि ये लाशें जापानी सैनिकों की नहीं हो सकतीं, क्योंकि ये काफी पुरानी हो चुकी थीं. इसके पीछे कई मान्यताएं हैं. बताया जाता है कि इस झील के पास एक नंदा देवी का मंदिर है. माना जाता है कि राजा रानी ने मंदिर के दर्शन के लिए पहाड़ चढ़ने का फैसला किया, लेकिन वो यहां अकेले न जाकर नौकर के साथ ले गए. यह सब देखकर नंदा देवी नाराज हो गईं. उनका गुस्सा बिजली बनकर उन सब पर ऐसा गिरा कि वे सभी मौत के मुंह में समा गए. झील के बारे में यह भी कहा जाता है कि कंकाल उन लोगों के हैं जो किसी महामारी में एक साथ मारे गए.

वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि ये सभी सेना के जवान रहे होंगे, जो बर्फ के तूफान में फंस गए और मारे गए. बर्फीले पानी ने उनके शरीर को सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रखा. यह झील इतनी भयावह है कि ये कंकाल की जगह पूरे इंसान के अंग भी दिखाई देते हैं. इसे देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें अच्छी तरह से संरक्षित किया गया हो. इस झील में अब तक 700-800 इंसानी कंकाल पाए जा चुके हैं.शोध के मुताबिक, ये कंकाल सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि ग्रीस, साउथ ईस्ट एशिया के लोगों के भी हैं. नई रिसर्च बताती है कि यह सभी कंकाल अलग अलग नस्लों के हैं. इनमें महिला और पुरुष दोनों के कंकाल शामिल हैं.

समुद्र तल से 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘रूपकुंड झील’ अपनी बर्फ के नीचे दबे कंकालों के लिए कुख्यात है. इस झील की खोज पहली बार 1942 में एक गेम रिजर्व रेंजर ने की थी. यहां मई के आखिरी सप्ताह और सितंबर-अक्टूबर के बीच आ सकते हैं. मई की शुरुआत में बर्फ पर ट्रेकिंग भी कर सकते हैं. इसके बाद ज्यादातर मौसम में यहां बर्फ जमी रहती है.