फिलीपींस में 130 साल बाद खिले ‘खोए हुए’ एक्सकम लोहेरी फूल
फिलीपींस में एक फूल 100 साल से ज्यादा समय बाद वापस आया है। मसुंगी जियोरिजर्व ने बताया है कि इतिहास में खो गई मानी जाने वाली फूलों की ये प्रजाति रिजल में फिर से खिल रही है। रिजल के संरक्षण क्षेत्र ने पिछले रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी है कि उन्हें अपने एक रास्ते पर एक्सकम लोहेरी (Exacum loheri) के कई पौधे खिले हुए मिले, जो सिर्फ फिलीपींस के कुछ इलाको में पाए जाने वाला फूल है। माना जा रहा है कि मसुंगी में करीब 130 सालों बाद ये ‘खोए हुए’ फूल खिले हैं।
एक्सकम लोहेरी एक अक्लोरोफिलस (क्लोरोफिल रहित) और माइकोहेटरोट्रॉफिक पौधा है। यानी इसमें क्लोरोफिल नहीं बल्कि माइकोहेटरोट्रॉफिक है। ऐसे में यह पोषक तत्वों के लिए प्रकाश संश्लेषण के बजाय मिट्टी में मौजूद कवक पर निर्भर होता है। इसे सबसे पहले 1895 में स्विस वनस्पतिशास्त्री ऑगस्ट लोहेर ने फिलीपींस के रिजल प्रांत में खोजा था।
ऐसा मान लिया गया था कि यह पौधा समय के साथ खो गया। यह केवल एक सदी पुराने ऐतिहासिक संग्रहों में ही मौजूद था, जब तक कि पिछले साल मसुंगी के चूना पत्थर के जंगलों में घोंघे के सर्वेक्षण अध्ययन के दौरान इसे फिर से नहीं खोजा गया। शोधकर्ताओं ने नीले-बैंगनी रंग के छोटे फूल की तस्वीरें लीं, जिससे यह 130 से अधिक वर्षों में एक्सकम लोहेरी का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड बन गया।
शोधकर्ताओं ने उस समय कहा था कि इसके सीमित फैलाव को देखते हुए यह माना जाता है कि यह प्रजाति बहुत दुर्लभ है और शायद अभी खतरे में है। इस अहम खोज के एक साल बाद अब मसुंगी के डिस्कवरी ट्रेल के किनारे और भी एक्सकम लोहेरी के पौधे मिले हैं। इससे एक्सपर्ट को उम्मीद जगी है कि खोई हुई प्रजाति फिर से फल-फूल सकती है।
मसुंगी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह याद दिलाता है कि जानी-पहचानी जगहों पर भी ऐसी प्रजातियां हो सकती हैं जो देखे जाने, अध्ययन किए जाने और संरक्षित किए जाने का इंतजार कर रही हों। कभी-कभी संरक्षण का मतलब यह सुनिश्चित करना होता है कि विज्ञान की नजर से खो चुकी प्रजाति को फिर से खिलने के लिए जगह मिले।
