मादुरो तो गए… अब वेनेजुएला की सत्ता कौन चलाएगा ? क्या मारिया कोरिना संभालेंगी कमान?
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटैक के बाद पूरी दुनिया को बताया कि मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया है. इसके साथ ही वेनेजुएला में पिछले 25 वर्षों से जमी चाविस्मो यानी ह्यूगो चावेज की विचारधारा की सत्ता की जड़ें उखड़ गई हैं. लेकिन मादुरो के जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वेनेजुएला की गद्दी पर कौन बैठेगा? क्या यह कुर्सी उस मारिया कोरिना मचाडो के पास जाएगी, जिन्हें वेनेजुएला की आयरन लेडी कहा जाता है?
57 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की राजनीति का वो चेहरा हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से मादुरो की तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया है. उन्हें वेनेजुएला की सबसे निडर नेता माना जाता है. एक इंजीनियर से राजनेता बनीं मचाडो, वेनेजुएला की दक्षिणपंथी पार्टी वेंटे वेनेजुएला की संस्थापक हैं. उनकी छवि एक ऐसी नेता की है जो कभी झुकती नहीं. जहां जुआन गुआइदो और लियोपोल्डो लोपेज जैसे कई विपक्षी नेता या तो जेल गए या देश छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए, वहीं मारिया कोरिना ने वेनेजुएला में रहकर ही मादुरो की आंखों में आंखें डालकर चुनौती दी.
मारिया कोरिना मचाडो के संघर्ष और लोकतंत्र के प्रति उनकी निष्ठा को वैश्विक स्तर पर भी सराहा गया है. उन्हें उनके अहिंसक संघर्ष और वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त है . उनकी यह अंतरराष्ट्रीय छवि उन्हें मादुरो के बाद देश का नेतृत्व करने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाती है.
मारिया कोरिना मचाडो की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निकोलस मादुरो को उनसे डर लगता था. 2023 में वेनेजुएला के विपक्ष ने अपना संयुक्त उम्मीदवार चुनने के लिए प्राइमरी चुनाव आयोजित किए. इसमें मारिया कोरिना को 90% से अधिक वोट मिले. वे जनता की पहली पसंद थीं. लेकिन मादुरो सरकार जानती थी कि अगर मारिया चुनाव लड़ीं, तो मादुरो की हार तय है. इसलिए, मादुरो के नियंत्रण वाले सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने एक पुराना और फर्जी मामला उठाकर मारिया कोरिना को 15 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया. यह मादुरो की सबसे बड़ी गलती साबित हुई.
