बस्तर में माओवादियों का ‘कुबेर का खजाना’ बरामद, 3 महीने में 6.75 करोड़ नगद और 8 किलो सोना जब्त

बस्तर में माओवादी संगठन एक समय करोड़ों रुपए लेवी के रूप में वसूली करता था, अब जब बस्तर से माओवादी संगठन समाप्त हो चुका है तब माओवादी संगठन द्वारा डंप में छुपाए गए लेवी के करोड़ों रुपए बरामद हो रहे हैं. बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया बीते तीन महीने के अंदर फोर्स के जवानों ने तकरीबन 6 करोड़ 75 लाख रुपए और 8 किलोग्राम सोना बरामद किया है. फोर्स द्वारा जब्त किए गए सोने की अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, वहीं फोर्स का सर्चिंग ऑपरेशन अब भी जारी है. आत्म समर्पण कर चुके माओवादियों के इनपुट के आधार पर फोर्स ने कई डंप बरामद किए है, सबसे ज्यादा फोर्स को कामयाबी दक्षिण बस्तर के बीजापुर जिले में मिली है. अब तक बरामद किए गए करोड़ों रुपए और सोना बरामद होने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर माओवादियों के पास इतनी अकूत संपत्ति आई कहां से. इस पर वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी कहते हैं कि माओवादी डंप से बरामद की गई संपत्ति सिर्फ बानगी है. माओवादी संगठन डेडलाइन से पूर्व कितना भी कमजोर हुआ हो लेकिन माओवादी संगठन के पास कम से कम 50 करोड़ रुपए होने चाहिए. राजेंद्र तिवारी के अनुसार, माओवादी संगठन की सप्लाई चैन और लेवी वसूली के तरीके के चलते माओवादी संगठन के पास हर साल बड़ी मात्रा में पैसे पहुंचाते थे. माओवादी अपने संगठन को चलाने के लिए लेवी के रूप में तेंदुपत्ता संग्राहक, ठेकेदारों, अंदरूनी इलाकों में सड़क और पुल-पुलियों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों से करोड़ों रुपए हर साल वसूला करते थे.

डेडलाइन्स से पूर्व माओवादियों की सप्लाई चैन को चोक करने के लिए सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास किए. बस्तर में तेंदुपत्ता संग्राहकों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसे देकर सरकार ने इसकी पहल भी की थी लेकिन अब तक कई जिलों में इसे पूर्णतः सरकार लागू नहीं कर पाई है. बताया जा रहा है बड़ी संख्या में संग्राहकों के पास बैंक खाता ही नहीं था. ऐसे में बीजापुर और सुकमा जैसे जिले में आदिवासी संग्राहकों ने नकद भुगतान की प्रक्रिया अपनाने की मांग सरकार से की थी. जबकि साल 2026 में शुरू हुई तेंदुपत्ता संग्रहण में सरकार ने वन विभाग को सभी संग्राहकों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने के निर्देश दिए हैं.