मार्क जकरबर्ग ने चुना ‘भारतीय’ CEO, कौन हैं सीजे देसाई पर मेटा ने खेला बड़ा दांव, मिली AI की कमान
फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा अब AI की दुनिया में एक नया कारोबार खड़ा करने जा रही है. इस काम की जिम्मेदारी कंपनी ने भारतीय मूल के टेक एग्जीक्यूटिव चिरंतन ‘सीजे’ देसाई को दी है. दिलचस्प बात यह है कि देसाई करीब एक साल पहले ही MongoDB के सीईओ बने थे और अब सीधे मार्क जकरबर्ग को रिपोर्ट करेंगे.
मेटा ने मेटा एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. इसका मकसद मेटा के एआई मॉडल, एआई एजेंट और दूसरे टूल को कंपनियों और डेवलपर्स तक पहुंचाना है. जकरबर्ग ने इसे मेटा के कारोबार का अगला बड़ा पिलर बताया है.
चिरंतन देसाई का शुरुआती जीवन भारत में बीता. वह 1993 में अमेरिका गए थे. 1995 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री और एमबीए पूरा किया. उनके करियर की शुरुआत 1995 में ओरेकल से हुई.
देसाई का भारत से जुड़ाव सिर्फ उनकी शुरुआती पढ़ाई और जीवन तक नहीं रहा. ओरेकल और बाद में पिवोटल सॉफ्टवेयर के लिए बेंगलुरु में ऑफशोर कारोबार भी बनाया और चलाया. यानी भारत के टेक टैलेंट और यहां के टेक इकोसिस्टम के साथ उनका प्रोफेशनल कनेक्शन काफी पुराना है.
ओरेकल के बाद उन्होंने सिमेंटेक, ईएमसी, सर्विसनाउ, क्लाउडफ्लेयर और मोंगोडीबी जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभालीं. सर्विसनाउ में वह प्रेसिडेंट और सीओओ तक पहुंचे और कंपनी के कारोबार को बड़े स्तर पर बढ़ाने में उनकी भूमिका रही. अब यही अनुभव मेटा अपने एंटरप्राइज एआई कारोबार में इस्तेमाल करना चाहती है.
गौरतलब है कि हाल ही में Meta ने WhatsApp का सीईओ भारतीय कुणाल शाह को बनाया है. अब इसके बाद मेटा के टॉप पद में एक और भारतीय की एंट्री हो गई है. हालांकि देसाई भारतीय मूल के हैं और अमेरिकी नागरिक हैं. सत्य नडेला और सुंदर पिचाई की तरह.
मेटा भारत को पहले से अपने सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में गिनती है. कंपनी के मुताबिक भारत में करोड़ों लोग हर दिन फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं और देश में उसका कारोबार से जुड़ा इकोसिस्टम भी बहुत बड़ा है.
मेटा ने इस साल भारत में छोटे कारोबारों के लिए WhatsApp पर बिजनेस AI भी शुरू किया है. यह एआई ग्राहकों के सवालों का जवाब दे सकता है, प्रोडक्ट की जानकारी दे सकता है, लीड संभाल सकता है, अपॉइंटमेंट बुक कर सकता है और बिक्री में मदद कर सकता है. यह सुविधा भारत की स्थानीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई गई है. यानी भारत पहले ही मेटा की बिजनेस एआई रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
अब मेटा इस मॉडल को बड़े स्तर पर ले जाना चाहती है. छोटे दुकानदार से बड़ी कंपनी तक, एआई बदल सकता है कारोबार. भारत में WhatsApp सिर्फ चैट करने वाला ऐप नहीं है. छोटे कारोबारी ग्राहकों से बात करने, ऑर्डर लेने, प्रोडक्ट की जानकारी देने और पेमेंट तक के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं.
इसका मतलब आने वाले समय में किसी छोटे कारोबारी को हर ग्राहक के सवाल का जवाब देने के लिए अलग कर्मचारी रखने की जरूरत कम हो सकती है. एआई ग्राहक से बात कर सकता है, सामान सुझा सकता है और जरूरत पड़ने पर इंसान को बातचीत सौंप सकता है.
मेटा के मुताबिक दुनिया भर में दस लाख से ज्यादा कारोबार पहले ही उसके बिजनेस एजेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत जैसे बड़े छोटे-कारोबार वाले बाजार में इसका असर खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है.
