माया सभ्यता की बंदरिया की कब्र मिली, शोध से पता चला दी गई थी बलि

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लगभग 1,700 साल पहले, तेओतिहुआकान में माया सभ्यता से जुड़े किसी नेता ने वहां के खास लोगों को एक स्पाइडर मंकी तोहफे में दिया. लेकिन बाद में उस बंदर को दक्षिण ले जाया गया, जहां बहुत ही दर्दनाक तरीके से उसकी बलि दे दी गई. हाल ही में किए गए शोध से पता चलता है कि ये बलि दो महान सभ्यताओं के बीच सामाजिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दी गई थी.

मेक्सिको सिटी के बाहरी इलाके में एक जगह है तेओतिहुआकान, जो कोलंबिया से पहले सबसे बड़ा महानगर था. इस शहर ने 378वीं सदी तक माया क्षेत्र पर अपने सैन्य अधिकार का प्रयोग किया था, हालांकि इससे पहले, तेओतिहुआकान-माया संबंधों के बारे में बहुत कम जानकारी है.

nawa sugiyama

प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (Proceedings of the National Academy of Sciences -PNAS) में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक, 2018 में इस शहर में खुदाई करते हुए पुरातत्वविदों को एक स्पाइडर मंकी का कंकाल मिला. इस खोज से उस दौर की सभ्यताओं के बारे में काफी जानकारी मिलती है. इससे यह भी पता चलता है कि माया सभ्यता के उच्च नेताओं को नागरिक कार्यों में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया जाता था.

दक्षिणी मेक्सिको और ग्वाटेमाला के जंगलों में पाए जाने वाले स्पाइडर मंकी माया क्षेत्र के मूल निवासी माने जाते हैं. इसलिए इस बंदर का तेओतिहुआकान में मिलना आश्चर्य की बात थी. मध्य-मैक्सिकन शहर में इस तरह के एक जानवर को बलि की वेदी पर मिलना यह बताता है कि इसे वहां से आने वाले किसी राजनयिक ने उपहार में दिया होगा.

बंदर के साथ मिला कीमती सामान

जिस तरह से यह बंदर मिला है, उससे साफ पता चलता है कि उसपर क्रूरता की गई थी. बंदर के कंकाल के अवशेषों के साथ एक गोल्डन ईगल भी मिला जो आज भी मेक्सिको का एक प्रतीक है. इसके साथ कई कीमती सामान भी रखे गए थे. इनमें शंख और कीमती पत्थर से बनी कलाकृतियां मौजूद थीं. एक बड़ी दावत से जुड़े 14,000 से ज्यादा चीनी मिट्टी के टुकड़े भी खोजे गए, साथ ही स्पाइडर मंकी के चित्र वाला म्यूरल भी मिला था.

बंदर को कैद में रखा गया था

शोधकर्ताओं का कहना है कि हमने इस बंदर के कंकाल का बारीकी से निरीक्षण किया है. इस स्पाइडर मंकी को बंधक बनाया गया था. यह बंदर टियोतिहुआकान और माया के बीच राजनयिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दिया गया एक उपहार था. रेडियोकार्बन डेटिंग से संकेत मिलते हैं कि 250 और 300वीं शताब्दी के बीच इस जानवर की बलि दी गई थी.

बंदर के हाथ उसकी पीठ के पीछे बंधे थे. यह बलि उन जानवरों से काफी मिलती-जुलती है जिनकी बलि सूर्य और चंद्रमा के पिरामिडों (Pyramids of the Sun and Moon) में दी गई थी. इनमें से कई बलि पूरे रीति-रिवाजों से की गई थीं, ताकि तेओतिहुआकान की राजनीतिक संरचना बनी रहे.

बलि से पहले खिलाई गई थी मिर्ची

बंदर का डीएनए लिया गया, उसकी रेडियोकॉर्बन डेटिंग की गई, साथ ही कैमिकल डाइटरी एनलिसिस भी किया गया. दांतों का विश्लेषण करते हुए, शोधकर्ताओं ने बताया कि यह जानवर जंगल में ज्यादातर फल खाता था, लेकिन कैद में इसे मक्का और मिर्ची खिलाई गई थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि ये एक बंदरिया थी. मौत के समय इस बंदर की उम्र 5 से 8 साल के बीच रही होगी और बलि देने से पहले इसे करीब दो साल तक कैद में रखा गया था. शोधकर्ताओं ने बताया कि बंदर ने कैद में बहुत यातनाएं झेली थीं. इसने अपने पिंजरे की सलाखों पर लगातार काटने की कोशिश की थी, जिससे उसके कुछ दांत भी टूट गए थे.

शोधकर्ताओं ने इस बंदर की तुलना प्रसिद्ध पांडा लिंग-लिंग और हिंग-हिंग के साथ की, जिन्हें 1972 में चीन ने अमेरिका को उपहार में दिया था. ये चीन के बारे में अमेरिकी धारणाओं को बदलने में बहुत प्रभावशाली साबित हुए थे. शोध की लेखक नवा सुगियामा (Nawa Sugiyama) का कहना है कि यह शोध हमें कूटनीति के सिद्धांतों को समझने में मदद करता है. यह समझने में मदद करता है कि शहरीकरण कैसे विकसित हुआ और कैसे विफल हुआ.