मीनाक्षी नटराजन पहुंची सुप्रीम कोर्ट, नामांकन रद्द मामले में कल होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जल्‍द सुनवाई का आग्रह किया है. याचिकाकर्ता मीनाक्षी नटराजन की ओर से दलील दी गई कि मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए 18 जून को मतदान प्रस्तावित है, इसलिए मामले की शीघ्र सुनवाई आवश्यक है. चुनाव आयोग (ECI) से अभी तक कोई राहत या स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है. आज नाम वापसी का अंतिम दिन है.
इस विवाद ने पूरे देश का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला और सीट चोरी बता रही है. वहीं भाजपा इसे कानून के अनुसार सही फैसला मान रही है. मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की कोर टीम की सदस्य मानी जाती हैं. उनका नामांकन खारिज होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है. पार्टी अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की रणनीति बना रही है. दिल्ली में आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा हुई.

दरअसल मीनाक्षी नटराजन का नामांकन 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था. यह फैसला भाजपा नेताओं, जिनमें राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी शामिल हैं, द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद लिया गया. इस मामले में भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी शपथपत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी. रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के अनुसार, नटराजन ने अक्टूबर 2025 में हैदराबाद की अदालत द्वारा जारी नोटिस का जवाब दिया था, लेकिन नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में इस मामले का उल्लेख नहीं किया. लिहाजा इसी बात की गंभीरता और तमाम मामलों को देखते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने माना कि शपथपत्र अधूरा है और इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज कर दिया गया. हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है. पार्टी का तर्क है कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, क्योंकि हैदराबाद की अदालत ने अभी तक उनके खिलाफ दायर निजी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया है. कांग्रेस का कहना है कि संज्ञान लेने से पहले जारी किया गया नोटिस ऐसा लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, जिसकी जानकारी देना अनिवार्य हो.

भोपाल में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट शुक्रवार को दोपहर 3 बजे विधानसभा पहुंचेंगे. राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा भी शुक्रवार को दोपहर 3 बजे तक निर्धारित है. ऐसे में सभी की नजरें चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर टिकी हुई हैं. इस बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र पहले ही निरस्त हो चुका है. नामांकन निरस्त होने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आपत्ति दर्ज कराई है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद राज्यसभा चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल गया है. भाजपा की ओर से रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया गया है. नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि चुनावी प्रक्रिया में कोई नया मोड़ नहीं आता है, तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है. हालांकि अंतिम स्थिति नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने और निर्वाचन आयोग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.