दावा-ठाकरे गुट के 14 विधायक एकनाथ के संपर्क में, शिंदे के MLA बोले-जल्द होगा ऑपरेशन टाइगर-4
शिवसेना शिंदे गुट के विधायक मुरजी पटेल ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में राज्य में ऑपरेशन टाइगर-4 होने वाला है। पटेल का कहना है कि शिवसेना ठाकरे गुट के करीब 14 विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लोकसभा में कुल 9 सांसदों में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। लोकसभा में अब शिंदे के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। हालांकि, 14 विधायकों वाली बात को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मुरजी पटेल के दावे के मुताबिक, ठाकरे गुट के सांसदों के बाद अब विधायक और फिर नगरसेवक भी शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस पूरी चर्चा में 14 का आंकड़ा बेहद अहम माना जा रहा है।
विधानसभा में ठाकरे गुट के पास 20 विधायक हैं। कानून के मुताबिक, अगर इनमें से दो-तिहाई विधायक एक साथ दलबदल करते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत अलग कानूनी और राजनीतिक स्थिति बन सकती है।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने किसी अनजान जगह पर एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है। इसके अलावा, महाविकास अघाड़ी (MVA) की हालिया बैठक में 60 में से 37 विधायकों की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक अटकलों को बढ़ा दिया।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सभी 6 सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का ऐलान किया था। डिप्टी सीएम ने कहा था, ‘जब 2022 में हमने पार्टी और धनुष-बाण बचाने के लिए विद्रोह किया था, तब 40 विधायक थे और अब हमने छक्का लगाया है।’
उन्होंने कहा, ‘ हमारी लड़ाई बालासाहेब के विचारों को बचाने के लिए है, इसीलिए आज ये 6 सांसद बालासाहेब की असली शिवसेना में शामिल हुए।’
2024 विधानसभा चुनाव की कुल 288 सीटों में से भाजपा, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की NCP वाले महायुति गठबंधन को 235 सीटें मिलीं। महाविकास अघाड़ी (MVA) ने 50 सीटें जीतीं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) सिर्फ 20 सीटों पर सिमट गई।
2024 के लोकसभा चुनाव में 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में विपक्षी INDIA गठबंधन (महाविकास अघाड़ी) ने बढ़त हासिल की और 30 सीटें जीतीं, इनमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 9 सीटें मिलीं। NDA (महायुति) ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
बालासाहेब ठाकरे की मुखिया रहते शिवसेना में पहली बगावत 1991 में हुई थी। पार्टी के नेता छगन भुजबल 14 विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 1999 में शरद पवार जब कांग्रेस से अलग हुए तो छगन भी साथ चले गए। पवार ने एनसीपी बनाई। 2023 में एनसीपी में टूट हुई तो वे अजित पवार गुट के साथ आ गए।
