MP : ग्वालियर में 5 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाई पटवारी, लोकायुक्त ने की कार्रवाई

ग्वालियर : सरकार की तमाम सख्तियों और छापामार टीमों द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाईयों के बावजूद मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सूबे के ग्वालियर से सामने आया है। यहां लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला पटवारी को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि, महिला पटवारी जमीन के सीमांकन और नामांतरण करने के एवज में शिकायतकर्ता से 15 हजार रूपए रिश्वत की मांग कर रही थी। टीम द्वारा शिकायत की पुष्टि किए जाने के बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम देेते हुए महिला पटवारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि, जिले के मुरार इलाके के सिरसौद गांव में रहने वाले मंशाराम ने 16 जून को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि, उसकी बहन गुड्डी की जमीन का सीमांकन और उसकी पत्नी सावित्रीबाई के नाम जमीन का नामांतरण कराने के लिए वो गूंधारा हल्का की पटवारी रेखा शाक्य के पास गए थे, लेकिन काम करने के एवज में उनकी ओर से 15 हजार रुपए की डिमांड की जा रही है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वो पहले भी करीब साढ़े तीन हजार रूपए की रकम महिला पटवारी को दे चुका है, ताकि वो काम कर दें, बावजूद इसके वो और पैसों की डिमांड किए जा रही हैं।

शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा के निर्देश पर लोकायुक्त टीम ने सत्यापन किया। जांच में शिकायत सही पाई गई और यह भी सामने आया कि, आरोपी पटवारी शिकायतकर्ता से पहले भी 3 हजार 500 रुपए रिश्वत ले चुकी है और आगे भी रिश्वत की डिमांड कर रही है। इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने मुरार स्थित पूनम माथुर के मकान की तीसरी मंजिल पर बने कमरे में जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी पटवारी रेखा शाक्य को 5 हजार रुपए रिश्वत की रकम दी, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए लोकायुक्त पुलिस एसपी निरंजन शर्मा ने बताया कि, ट्रैप के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई है। महिला पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धारा-7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। कार्रवाई में करीब 10 सदस्यीय लोकायुक्त टीम और स्वतंत्र शासकीय गवाह शामिल रहे।