गिरफ्तारी से पहले अब एमपी पुलिस को लिखित में बतानी होगी वजह, नई गाइडलाइन जारी

मध्य प्रदेश में अब पुलिस को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय केवल बोलकर जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा। क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट ने निर्देश दिए हैं कि गिरफ्तारी के ठोस कारणों को लिखित रूप में बताना अनिवार्य होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि गिरफ्तार व्यक्ति को यह पता रहे कि उसे किस आधार पर गिरफ्तार किया जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि कानूनी पेचीदगियों के कारण आरोपी को अपनी गिरफ्तारी का आधार समझ नहीं आता। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी के आधार स्थानीय भाषा या ऐसी भाषा में लिखे जाने चाहिए, जिसे गिरफ्तार व्यक्ति भली-भांति समझ सके। इससे भाषाई बाधा दूर होगी और न्याय प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी।

एमपी पुलिस मुख्यालय से जारी सर्कुलर के मुताबिक, यह लिखित जानकारी गिरफ्तारी के समय ही दी जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाता है, तो आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से कम से कम दो घंटे पहले लिखित सूचना उपलब्ध कराना जरूरी होगा। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया का विवरण गिरफ्तारी पंचनामा या संबंधित अभिलेखों में दर्ज करना भी जरूरी है।

यह कड़ा कदम महाराष्ट्र राज्य बनाम अन्य के मामले में 6 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से पारित आदेश के पालन में उठाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों को जानना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसके अतिरिक्त, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 के प्रावधानों को भी इस नई व्यवस्था का आधार बनाया गया है।

अगर कोई पुलिस अधिकारी इन नियमों की अनदेखी करता है, तो परिणाम गंभीर होंगे। सर्कुलर में चेतावनी दी गई है कि इन निर्देशों का पालन न होने पर गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है और अभियुक्त को तुरंत रिहाई का अधिकार मिल जाएगा।