NASA का खुलासा…मंगल ग्रह पर मिले जीवन के 3 सबसे बड़े सबूत
NASA के पर्सिवियरेंस रोवर को मंगल ग्रह पर पानी होने के नए और महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं इन खोजों से पता चलता है कि जेजेरो क्रेटर में पानी की गतिविधियां कई बार हुईं थीं. इसका मतलब है कि मंगल ग्रह पर पुराने समय में अलग-अलग समय पर जीवन के लिए सही वातावरण रहा होगा. उन्नत खनिज जांच(Analysis)का इस्ते्माल करके वैज्ञानिकों ने पानी की बदलती स्थितियों की एक ऐसी कहानी बनाई है जो छोटे जीवों को जन्म दे सकती थी. वैज्ञानिकों ने 24 अलग-अलग खनिजों को पहचाना जिससे मंगल ग्रह के रासायनिक विकास का पता चला. ये नतीजे जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स नाम के शोधपत्र में छपे हैं जो ये मंगल ग्रह के बदलते स्वभाव के बारे में नई जनकारी देते हैं. Perseverance Rover अपने मिशन के तहत जेजेरो क्रेटर का अध्ययन कर रहा है. वहां की खनिज भंडारों की जांच के लिए वैज्ञानिकों ने MIST नाम की एक आधुनिक विश्लेषण तकनीक का इस्तेमाल किया. यह तकनीक रोवर के PIXL डिवाइस से मिले एक्स-रे डेटा के साथ काम करती है.
राइस यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट एलेनोर मोरलैंड ने बताया कि जेजेरो क्रेटर में मिले खनिज यह बताते हैं कि वहां समय के साथ तरल पानी(Liquid Water)के कई अलग-अलग दौर थे. हर दौर में पानी का रासायनिक मिश्रण और तापमान अलग था जिसने खनिजों के बनने के तरीके को प्रभावित किया. इन नतीजों से पता चलता है कि जेजेरो क्रेटर में पानी की हलचल सिर्फ एक बार नहीं हुई बल्कि कई चारणों में हुई.
ऐसे खनिज आमतौर पर वहां बनते हैं जहां पानी का पीएच स्तर संतुलित(Neutral)होता है यानी यह दौर पहले वाले दौर से जीवन के लिए ज्यादा अच्छा था. जेजेरो क्रेटर में पानी की हलचल का आखिरी दौर जीवन की संभावना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय पानी ठंडा और क्षारीय था जो पृथ्वी के जीवन-योग्य माहौल जैसा था. सेपियोलाइट नामक एक खनिज इसी दौर में बना जो आमतौर पर पृथ्वी के क्षारीय वातावरण में मिलता है.
