छत्तीसगढ़ की शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को मिला राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया अलंकृत

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रतिष्ठित समारोह में छत्तीसगढ़ की प्रख्यात ढोकरा बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित कियावर्ष 2023 के लिए चयनित इस सम्मान को हस्तशिल्प क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का सर्वोच्च राष्ट्रीय गौरव माना जाता है। यह पुरस्कार भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा प्रदान किया जाता हैढोकरा बेलमेटल कला की जानी-मानी कलाकार हीराबाई बघेल लंबे समय से इस परंपरागत शिल्प को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटी हैं। वर्ष 2023 में पांच शिल्प गुरुओं और 18 वरिष्ठ शिल्पियों को राष्ट्रीय स्तर पर चुना गया है, जिनमें हीराबाई का नाम छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनका यह सम्मान पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण है।

हीराबाई का कला-सफर किसी एक दिन में नहीं बना। सारंगढ़बिलाईगढ़ जिले के वनाच्छादित बैगीनडीह गांव से आने वाली इस शिल्पकार ने अपनी प्रतिभा से पहले भी कई बार राज्य का नाम रोशन किया है। साल 2011–12 में उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बेलमेटल कला के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुका है। परिवार में कला की परंपरा पुरानी हैउनके पति मिनकेतन बघेल को भी 2006–07 में राज्य सरकार सम्मानित कर चुकी है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद हीराबाई झरेका बघेल ने कहा कि ढोकरा कला उनकी विरासत है और उनके पिता भुलाऊ झरेका तथा पति ने ही उन्हें इस विधा में दक्ष बनाया। पुरस्कार के लिए चयनित शिल्पी हीराबाई झरेका बघेल ने कहा कि मेरे पिता भुलाऊ झरेका व पति ही मेरी प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने मुझे ढोकरा बेलमेटल कला सिखाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया।