झारखंड में 8 इनामी समेत 27 नक्सलियों ने किया सरेंडर

झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ को आज एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली. पुलिस मुख्यालय में 21 मई को आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने 8 इनामी समेत कुल 27 नक्सली अपने हथियार के साथ सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटे. आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों में से 25 भाकपा माओवादी संगठन के हैं, जबकि दो जेजेएमपी उग्रवादी संगठन से जुड़े हैं. सरेंडर करने वाले भाकपा माओवादियों का यह दस्ता कोल्हान के बेहद दुर्गम पहाड़ी व जंगली इलाकों में सक्रिय था. इस दस्ते ने पिछले कुछ सालों में पूर्व विधायक पर जानलेवा हमला करने, सुरक्षाबलों की हत्या करने और ताबड़तोड़ आईईडी ब्लास्ट करने जैसी कई वारदातों को अंजाम दिया था.

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन उग्रवादियों के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में कुल 426 गंभीर मामले दर्ज हैं. इन पर हत्या, पुलिस बलों पर हमला, लेवी वसूली, विस्फोट और हथियारबंद गतिविधियों जैसे आरोप हैं. सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंपे हैं. इनमें एक एलएमजी इंसास, चार इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक बोल्ट एक्शन राइफल, एक पिस्टल, 31 मैगजीन, 2987 कारतूस और आठ वॉकी-टॉकी शामिल हैं.

आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख इनामी नक्सलियों में गादी मुंडा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा, रेखा मुंडा उर्फ जयंती, सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल और सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा के नाम शामिल हैं. जेजेएमपी संगठन के सचिन बेक ने भी हथियार डाल दिए. इनके अलावा दर्शन उर्फ बिंज हांसदा, करण तियू उर्फ डांगुर, बासुमती जेराई उर्फ बासू, बैजनाथ मुंडा, रघु कायम उर्फ गुणा, किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका और राम दयाल मुंडा समेत कई अन्य उग्रवादी भी मुख्यधारा में लौटे हैं. सरेंडर करने वाली महिला कैडरों में वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया और अनिशा कोड़ा उर्फ रानी सहित कई नाम शामिल हैं.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही हथियार जमा करने के एवज में निर्धारित राशि भी अलग से दी जाएगी.