नेपाल ने कहा, चीन से बाल बाल बचे, जानिए ड्रैगन की लगाई आग में कैसे जल रहा श्रीलंका- पाकिस्तान?

अंतरराष्ट्रीय

नई दिल्ली : भारत के दो बड़े पड़ोसी देशों… चीन और पाकिस्तान में स्थिति काफी नाजुक है और दोनों देश आर्थिक और राजनीतिक संकट में बुरी तरह फंसे हुए हैं। इन दोनों देशों में सबसे कॉमन फैक्टर है चीन। श्रीलंका और पाकिस्तान… दोनों देशों ने चीन से अरबों डॉलर कर्ज के तौर पर ले रखे हैं और अब जो रिपोर्ट सामने आ रहे हैं, उनसे पता चल रहा है, कि दोनों देशों में आग चीन ने ही लगाई है और नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारत दौरे के दौरान जो कुछ कहा है, उससे साफ जाहिर होता है, कि किस तरह से चीन… भारत के पड़ोसी देशों को अस्थिर कर रहा है।

नेपाली प्रधानमंत्री का भारत दौरा
पिछले हफ्ते अपनी भारत यात्रा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अनौपचारिक रूप से मार्च के अंत में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की काठमांडू यात्रा के बारे में बातचीत साझा की। नेपाली पीएम, जिनकी पत्नी आरजू, काफी विद्वान मानी जाती हैं, उन्होंने कहा कि, चीन ने नेपाल को भारी कर्ज देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे नेपाल ने यह कहकर ठुकरा दिया, कि नेपाल सिर्फ चीन से अनुदान स्वीकार कर सकता है, ना की भारी-भरकम कर्ज। इसके साथ ही नेपाल ने चीन के साथ शी जिनपिंग के ड्रीम पोजेक्ट… बीआरआई प्रोजेक्ट पर भी एक समझौता करने से इनकार कर दिया।

दक्षिण एशिया में चीन के कर्ज का जाल
दक्षिण एशिया में चीन का कर्ज 4.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 40 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में नेपाल ने बीजिंग की के पाकिस्तान और श्रीलंका में बढ़ते राजनीतिक संकट को देखते हुए चीन के कर्ज के जाल से बाहर निकलने का बहुत सही वक्त पर फैसला किया है। पाकिस्तान की जीडीपी में चीन का कर्ज 10 प्रतिशत से ज्यादा है और जो पाकिस्तान अब तक चीन के साथ शहद जैसे मधुर संबंध होने का दावा करता था, वैसा अब नहीं रहा है, क्योंकि इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान राजनीतिक अराजकता से गुजर रहा है और पाकिस्तान के कई पत्रकारों का दावा है, कि इमरान खान भले ही अमेरिका पर साजिश करने का आरोप लगा रहे हों, लेकिन असल साजिश चीन ने की है, क्योंकि इमरान खान ने चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट को करीब करीब बंद कर दिया था, जिससे चीन काफी नाराज है।

श्रीलंका में भी बहुत बुरा संकट
श्रीलंका की स्थिति भी पाकिस्तान से अलग नहीं है और इस बार उनके पास भारत पर आर्थिक और राजनीतिक रसातल में धकेलने के लिए आरोप लगाने का कोई आधार भी नहीं है। वहीं, भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए अपना खजाना भी खोल दिया है और भारत लगातार श्रीलंका में खाद्य सामग्रियों के साथ साथ तेल की भी सप्लाई कर रहा है। इसके साथ ही भारत की तरफ से श्रीलंका को एक अरब डॉलर का क्रेडिट लाइन और डेढ़ अरब डॉलर की मदद भी की गई है। वहीं, श्रीलंका की विकराल स्थिति का दोष पूरी तरह से राजपक्षे इनकॉर्पोरेटेड के दरवाजे पर है, जिसने बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर चीन से काफी ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लिया और देश को गंभीर आर्थिक तनाव में ला खड़ा किया है। आज की स्थिति ये है, कि श्रीलंका में आपातकाल लगा दिया गया है और जनता के पास राजपक्षे परिवार के शासन की स्थिति का विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लिहाजा, देश में भारी अराजकता की स्थिति है और श्रीलंका के फिर से गृहयुद्ध में फंसने की आशंका है।

अन्य पड़ोसी देशों के लिए संदेश पाकिस्तान और श्रीलंका में जो परिस्थितियां बनी हैं और ये दोनों देश जिस तरह से बर्बादी के मुहाने पर खड़े हो गये हैं, उसने भारत के अन्य पड़ोसी देशों, जैसे मालदीव, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों को चीन से इन्फ्रास्ट्रक्टर विकास के लिए कर्ज लेने से पहले और चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने से पहले सौ बार सोचने के लिए मजबूर किया है। बहुत समय पहले की बात नहीं है, जब नेपाल में चीनी राजदूत नेपाली राजनीति में रानी मधुमक्खी की तरह हुआ करते थे, जहां माओवादी और कम्युनिस्ट राजनेता बीजिंग के प्रतिनिधि को श्रद्धासुमन अर्पित करते थे। लेकिन, सही वक्त पर नेपाल जाग गया है और उसे सच्चे और फर्जी दोस्त के बीच का अंतर पता चल गया है।

श्रीलंका-पाकिस्तान के लिए राह आसान नहीं नेपाल तो सही वक्त पर जाग गया है, लेकिन श्रीलंका और पाकिस्तान के लिए राहें इतनी आसान नहीं हैं। पहली बात तो ये… कि पाकिस्तान अभी तक चीन को दोस्त ही मान रहा है और पाकिस्तानी नेता अब उस स्थिति में भी नहीं हैं, कि चीन से नाता तोड़ सके। वहीं, अमेरिका के प्रति घृणा ने पाकिस्तान के पास चीन के खेमे में रहने के अलावा कोई और विकल्प छोड़ा भी नहीं है, जबकि दूसरी तरफ ऐसा लगता है कि, श्रीलंका ने महसूस किया है कि उसकी अर्थव्यवस्था में तबाही आई है, उसमें चीन का बड़ा योगदान है। वहीं, पाकिस्तान की स्थिति और जटिल हो गई है, क्योंकि इमरान खान ने देश को अपने अस्तित्व के लिए एक पूर्ण राजनीतिक संकट में धकेल दिया है। अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए इमरान खान ने अमेरिका को पाकिस्तान का दुश्मन बना दिया है और अगर चुनाव में इमरान खान फिर से जीत जाते हैं, तो फिर निकट भविष्य में अमेरिका- पाकिस्तान संबंध ठीक होने की स्थिति भी नहीं बन पाएगी, क्योंकि इमरान खान ने देश की एक बड़ी आबादी की भावना को अमेरिका के खिलाफ भड़का दिया है।

श्रीलंका की राजपक्षे सरकार जिस चीन की गोद में खेल रही थी, उस चीन ने जरूरत पड़ने पर श्रीलंका को दुत्कार दिया है। इसी साल जनवरी महीने में दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका ने चीन के सामने कर्ज में कुछ छूट के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन चीन ने कर्ज में किसी भी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया था। जनवरी के पहले हफ्ते में श्रीलंका के राष्ट्रपति ने चीन से अनुरोध किया था, कि श्रीलंका की आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खराब है, लिहाजा चीन की तरफ से श्रीलंका को कर्ज स्ट्रक्चर में कुछ रियायत दी जाए, जिसे चीन ने ना सिर्फ सीधे तौर पर नकार दिया है, बल्कि साफ कर दिया, कि श्रीलंका को कैसे अपने देश में सुधार कार्यक्रम लाना है, उसका फैसला वो चीन से पूछकर करे।

इकोनॉमी नेक्स्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक के पास 6.69 टन सोने का भंडार था, जिसमें से करीब 3.6 टन सोना अभी तक बेचा जा चुका है और अब अनुमान के मुताबिक, श्रीलंका के पास करीब 3.0 से 31 टन ही सोना बचा है। श्रीलंका ने कोई पहली बार सोना नहीं बेचा है, बल्कि इससे पहले साल 2020 की शुरूआत में श्रीलंका के पास 19.6 टन सोना था, जिसमें से 12.3 टन सोना बेच दिया गया। इससे पहले साल 2015, साल 2018 और साल 2019 मं श्रीलंका ने सोना बेचा था और विदेशी मुद्रा जमा किया था और अब स्थिति ये है, कि श्रीलंका के पास सिर्फ 3 टन सोना बचा है, यानि इसके बाद श्रीलंका के पास बेचने के लिए कुछ नहीं बचेगा।