यहाँ बना नया कानून, बिना लाइसेंस के पशु रखा तो जाना पड़ेगा जेल

राष्ट्रीय

गुजरात में सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए विधानसभा में शुक्रवार को एक बिल पास हुआ है. अब शहरों में इस तरह के पशुओं को रखने के लिए लाइसेंस की जरूरत होगी. अगर बिना लाइसेंस के पशु रखने की कोशिश की गई तो जेल जाना पड़ सकता है. इस मुद्दे पर गुरुवार को बहस शुरू हुई थी, फिर लंबी बहस के बाद शुक्रवार को इसे पास किया गया.

कानून के मुताबिक, जितने पशु रखने के लिए लाइसेंस मिला है उतने ही रखे जा सकेंगे. बाकियों को बेचना होगा या किसी को दे सकते हैं. इसके अलावा अगर पशु को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाना है तो स्थानीय प्रशासन से मंजूरी लेनी होगी.

बिल का नाम Gujarat Cattle Control (Keeping and Moving) In Urban Areas Bill है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस इसका विरोध कर रही थी. कांग्रेस ने इसे काला कानून बताया था और इसके खिलाफ राज्य में प्रदर्शन करने की धमकी भी दी.

किन पशुओं पर लागू होगा कानून?

शहरी विकास मंत्री विनोद मोरडिया (Vinod Moradiya) ने बताया कि यह कानून गाय, भैंस, बैल और बकरी पालन पर लागू होगा. उन्होंमे कहा कि इनको शहर में पालने से दिक्कत होती है क्योंकि कई जगह मालिक इनको खुले में सड़क पर आवारा छोड़ देता है.

मंत्री ने कहा कि कई मौकों पर ऐसे आवारा पशुओं की वजह से लोगों की जान भी चली गई है. विनोद मोरडिया ने यह भी कहा कि यह भी देखा गया है कि आवारा घूमती गाय रोड पर प्लास्टिक खाती है, जिससे उसकी भी मौत हो जाती है.

क्या होंगे नियम?

बताया गया है कि अगर शहर में किसी को गाय, भैंस, बैल या बकरी पालनी है तो संबंधित अथॉरिटी से लाइसेंस लेना होगा. जिन शहरों में यह नियम लागू होगा उसमें अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, वडोदरा, गांधीनगर, जूनागढ़, भावनगर और जामनगर शामिल है. 156 कस्बों में भी सख्ती की जाएगी. लाइसेंस मिलने के बाद मालिक को 15 दिन के अंदर अपने पशु की टैगिंग करानी होगी. इसके साथ-साथ उनको सड़क पर खुला घूमने से रोकना होगा.

क्या होगी सजा?

गुजरात विधानसभा में पास हुए बिल के मुताबिक, अगर 15 दिन के भीतर पशुओं की टैगिंग नहीं कराई जाती है तो एक साल तक की जेल हो सकती है, इसके अलावा 10 हजार का जुर्माना या फिर दोनों भी लगाया जा सकता है. इसके साथ-साथ शहरों में हर जगह इन पशुओं का चारा भी नहीं मिलेगा.

अगर पशु खुले में दिखा या उसका लाइसेंस नहीं हुआ तो उसको भी कैद किया जा सकता है. ऐसा करने से रोकने पर एक साल की सजा, 50 हजार का जुर्माना या फिर दोनों लगेंगे. अगर कैद किये गए पशु की टैगिंग हो रखी है तो मालिक पर पहली बार में 5 हजार, दूसरी बार में 15 हजार और तीसरी बार में FIR दर्ज की जाएगी. वहीं अगर पशु पर टैग नहीं हुआ तो उसे हमेशा के लिए प्रशासन के लोग ले जाएंगे और 50 हजार का फाइन भी लगाएंगे.