धरती पर नये महाद्वीप अमेसिया का होगा जन्म! गायब होगा सबसे बड़ा समुद्र?

दुनिया के सबसे बड़े महासागर को लेकर वैज्ञानिकों ने सबसे चिंताजनक भविष्यवाणी की है। वैज्ञानिकों में इस महासागर के अस्तित्व को लेकर चिंता है। वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर के सिकुड़ने के पीछे टेक्टोनिक प्लेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशांत महासागर जो पृथ्वी की सतह पर मौजूद सबसे बड़ी संरचना है वो धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है और यह बात जितनी हैरान करने वाली है उतनी ही चौंकाने वाली भी है।

NOAA ओशन एक्सप्लोरेशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रशांत महासागर 155 मिलियन वर्ग किलोमीटर (लगभग 60 मिलियन वर्ग मील) से ज्यादा इलाके में फैला हुआ है। धरती पर मौजूद सभी महाद्वीपों और द्वीपों का कुल जमीनी इलाका लगभग 149 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। इस तरह प्रशांत महासागर अकेले ही इन सबसे बड़ा है और फिर भी काफी जगह बच जाती है।

यह धरती की सतह के लगभग एक-तिहाई हिस्से को घेरे हुए है और दुनिया के महासागरों के कुल पानी का लगभग आधा हिस्सा इसमें है। अटलांटिक महासागर जिसे ज्यादातर लोग एक बहुत बड़े जल-क्षेत्र के तौर पर देखते हैं उसमें प्रशांत महासागर के मुकाबले आधा ही पानी है।

लगभग 200 से 250 मिलियन साल पहले जब सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया टूटा और प्राचीन सुपर-ओशन पैंथालासा में दरार आई तब प्रशांत महासागर बना। जैसे-जैसे टेक्टोनिक प्लेट्स ने ज़मीन को अलग किया अटलांटिक महासागर बना और विशाल पैंथालासा सिकुड़कर उस रूप में आ गया जिसे हम आज प्रशांत महासागर कहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशांत महासागर लगभग सबडक्शन जोन से घिरा हुआ है। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह खाइयों, भूकंपों और ज्वालामुखियों की एक बेल्ट है जो महासागर के किनारे-किनारे न्यूजीलैंड से जापान और फिर एंडीज़ तक फैली हुई है। पैसिफिक में अपनी एक फैलती हुई रिज भी है जिसे ‘ईस्ट पैसिफ़िक राइज’ कहते हैं लेकिन इसके आस-पास की खाइयों में इसकी जमीन का इतना बड़ा हिस्सा समा रहा है कि कुल मिलाकर यह बेसिन सिकुड़ रहा है।

वैज्ञानिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्हीं खाइयों में महासागर अपनी सबसे गहरी और चरम स्थितियों तक पहुंचता है। पश्चिमी पैसिफिक में स्थित ‘मारियाना ट्रेंच’ पृथ्वी पर सबसे गहरी जगह है। इसकी गहराई लगभग 11,000 मीटर है जो माउंट एवरेस्ट को उल्टा करने पर उसकी ऊंचाई से भी ज्यादा है।

यह एक सबडक्शन जोन है यानी उन जोड़ों में से एक जहां पैसिफिक की परत नीचे की ओर मुड़कर ग्रह के भीतर वापस खिसक रही है। किसी भी महासागर का सबसे गहरा बिंदु ठीक उसी प्रक्रिया के ऊपर स्थित है जो धीरे-धीरे इस महासागर को बंद कर रही है। पैसिफिक का आकार लगभग एक जैसी रफ्तार से कम हो रहा है यानी बहुत धीरे-धीरे और इसका पता लाखों वर्षों के दौरान ही चल पाता है।

प्रशांत महासागर भविष्य में पूरी तरह से बंद हो सकता है। 2022 में ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी में चुआन हुआंग की अगुवाई वाली एक टीम ने सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह पता लगाया कि महाद्वीप किस तरफ बढ़ रहे हैं। ‘नेशनल साइंस रिव्यू’ जर्नल में छपे और यूनिवर्सिटी द्वारा बताए गए उनके नतीजों के मुताबिक प्रशांत महासागर के 20 से 30 करोड़ सालों में बंद होने की सबसे ज्यादा संभावना है।

ऐसा होने से महाद्वीप एक साथ मिलकर ‘अमासिया’ नाम का एक नया महाद्वीप बनाएंगे क्योंकि अमेरिका और एशिया आपस में जुड़ जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया पहले से ही हर साल लगभग 7 सेंटीमीटर की रफ्तार से एशिया की ओर बढ़ रहा है। भविष्य के दूसरे सिमुलेशन में अटलांटिक महासागर के बंद होने और प्रशांत महासागर के खुले रहने की बात कही गई है जिससे अलग-अलग नामों वाले अलग-अलग सुपरकॉन्टिनेंट बनेंगे और सारे देशों की आपस में टक्कर होगी।