विधानसभा में उठा धान का उठाव नहीं होने का मुद्दा, MLA बघेल बोले-बस्तर में 2209 आंगनबाड़ी बिना भवन के संचालित

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सक्ती जिले में धान उठाव नहीं होने का मुद्दा उठा। विधायक रामकुमार यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि 17 जनवरी से धान का उठाव रोकने की वजह से किसानों का धान बारिश में खराब हुआ और करोड़ों का नुकसान हुआ। वहीं मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान की रिसाइक्लिंग रोकने के लिए अस्थायी तौर पर उठाव रोका गया था और 31 मार्च से पहले शेष धान उठा लिया जाएगा। सदन में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी इस फैसले और किसानों के नुकसान को लेकर सरकार से जवाब मांगा। बस्तर संभाग के आंगनबाड़ी केन्द्रों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठा। विधायक लखेश्वर बघेल ने बताया कि संभाग में 2209 आंगनबाड़ी केन्द्र बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। 1021 भवन जर्जर हालत में हैं, जबकि बड़ी संख्या में केन्द्रों में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं।

इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कई भवनों के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था के लिए स्वीकृतियां दी गई हैं और बजट की उपलब्धता के अनुसार कार्य कराया जाएगा।

विधायक रामकुमार यादव – सक्ती जिला समेत पूरे प्रदेश में धान का उठाव 17 जनवरी से आपने रोक दिया। यह आपने खुद स्वीकार किया है। जबकि सक्ती जिले में बहुत सारे राइस मिल हैं। धान का उठाव नहीं होने पर बारिश में धान खराब हो जाता है। इतने राइस मिल होने के बाद भी धान का उठाव क्यों रोका गया।

मंत्री दयालदास बघेल – धान की रिसाइक्लिंग न हो, इस कारण धान का उठाव रोका गया था।

रामकुमार यादव – धान का उठाव नहीं होने की वजह से धान पानी में भीग जाता है और इसका खामियाजा गरीबों को उठाना पड़ता है। गलती सरकार और अधिकारियों की है। बताया गया है कि सक्ती जिले में 30 करोड़ रुपए का धान चूहों ने खा लिया। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

दयालदास बघेल – सक्ती जिले में 47.41 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 44.25 लाख क्विंटल धान का उठाव हो चुका है। केवल 3.16 लाख क्विंटल धान का उठाव बाकी है। 31 मार्च से पहले धान उठा लिया जाएगा।