समंदर का कचरा बना जीवों की कॉलोनी, ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच को लेकर वैज्ञानिकों की चौंकाने वाली खोज
प्रशांत महासागर के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा इलाका है यहां पर सालों से प्लास्टिक का कचरा जमा होता जा रहा है. यह कचरा धीरे-धीरे समुद्र की लहरों के साथ घूमता रहता है. धूप, नमक और समय के असर से यह प्लास्टिक कमजोर तो हो जाता है. हालांकि खत्म नहीं होता है. वैज्ञानिकों को पहले लगता था कि खुले समुद्र में कोई जीव टिक नहीं सकता है. क्योंकि वहां न जमीन होती है न सहारा होता पर अब तस्वीर बदल रही है. वैज्ञानिक जब समुद्र से प्लास्टिक हटाने पहुंचे तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उस पर जिंदगी मिलेगी. जांच में सामने आया कि प्लास्टिक के टुकड़ों पर कई तरह के छोटे जीव चिपके हुए थे. कुछ वहीं रह रहे थे. कुछ बढ़ रहे थे और कुछ तो प्रजनन भी कर रहे थे.
यह जानकारी ‘नेचर’ नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में छपी एक स्टडी से सामने आई है. वैज्ञानिकों ने उत्तरी प्रशांत महासागर से प्लास्टिक के 105 बड़े टुकड़े इकट्ठा किए. ये टुकड़े उस इलाके से थे जहां समुद्री धाराओं के कारण कचरा जमा होता है. जांच में पाया गया कि लगभग हर टुकड़े पर कोई न कोई जीव मौजूद था.
इन प्लास्टिक के टुकड़ों पर बार्नेकल, छोटे केकड़े, झींगा जैसे जीव, समुद्री फूल और कई दूसरे छोटे जीव पाए गए. कुल मिलाकर 46 तरह के जीवों की पहचान हुई हैं ध्यान देने वाली बात यह थी कि इनमें से कई जीव आमतौर पर समुद्र किनारे रहते हैं. चट्टानों या बंदरगाह की दीवारों से चिपके रहते हैं. लंबे समय तक वैज्ञानिकों का मानना था कि खुले समुद्र में तटीय जीव जिंदा नहीं रह सकते. वहां न कोई सतह होती है, न छिपने की जगह और न ही खाने का भरोसा होता. अब वैज्ञानिकों का कहना है कि दिक्कत पानी की नहीं बल्कि सहारे की थी. जैसे ही प्लास्टिक के रूप में सतह मिली ये जीव वहां रहने लगे.
रिसर्च में यह भी सामने आया कि सबसे ज्यादा जीव जाल और रस्सी जैसे प्लास्टिक के टुकड़ों पर पाए गए है. इनके मुड़े हुए आकार में छाया और पकड़ने की जगह मिल जाती है. कुछ टुकड़े इतने पुराने थे कि बहुत पतले और कमजोर हो चुके थे. फिर भी उन पर जीव जमे हुए थे. ये प्लास्टिक समुद्र में छोटे-छोटे तैरते घर जैसे बन गए हैं.
ये जीव सिर्फ सफर नहीं कर रहे बल्कि वहीं अपना जीवन बिता रहे हैं. वैज्ञानिकों को कई जीवों में अंडे मिले और एक ही प्लास्टिक पर छोटे और बड़े दोनों आकार के जीव दिखे है. इससे यह साफ हो जाता है कि ये वहीं पैदा हो रहे हैं और बड़े हो रहे हैं.
वैसे देखा जाए तो समुद्र में प्लास्टिक की समस्या अब भी गंभीर है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब वैज्ञानिकों को समझ में आ गया है कि खुले समुद्र उतने खाली नहीं हैं जितना पहले माना जाता था. इंसान का फेंका कचरा अब समुद्र में नई और अनचाही दुनिया बना रहा है.
