भारत में मिले ओरांगुटान का इंडोनेशिया कनेक्शन, इंसानों के बाद सबसे समझदार है यह वनमानुष
ओडिशा प्रांत में जंगलों में ओरांगुटान के 5 बच्चे मिलने के बाद इस वनमानुष प्रजाति को लेकर भारत में चर्चा जोरों पर है। वन्य जीव एक्सपर्ट इन नन्हें ओरांगुटान के भारत पहुंचने के पीछे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के होने की आशंका जता रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कपियों की यह प्रजाति इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में पाई जाती है। इस बीच इंडोनेशिया ने भारत से इन नन्हें ओरांगुटान को वापस करने की मांग की है। ऐसे में आइए जंगल में पाए जाने वाले इस जीव के बारे में जानते हैं, जिसे इंसान के बाद सबसे बुद्धिमान प्रजातियों में माना जाता है।
कनाडा की प्राइमेटोलॉजिस्ट और एंथ्रोपोलॉजिस्ट बिरुटे मैरी गैल्डिकास ने अपनी जिंदगी के कई दशक इंडोनेशिया के जंगलों में इस जीव को जानने के लिए लगा दिए। गैल्डिकास के काम ने इस जीव के बारे में दुनिया को बड़ी जानकारी मुहैया कराई। साल 1971 में गैल्डिकॉस अपने पति रॉड ब्रिंडामोर के साथ इंडोनेशिया के बोर्नियो आइलैंड पर पहुंची। सुमात्रा और बोर्नियो ओरांगुटान के प्रमुख प्राकृतिक आवास हैं।
गैल्डिकास इंडोनेशिया में ओरांगुटान पर स्टडी करने आई थीं। एक ऐसा वन्यजीव, जिसे उस समय बहुत सब्जेक्ट माना जाता था। यह बड़े वानर आसानी से दिखाई नहीं देते थे, सावधान रहते थे औऱ ज्यादातर घने, दलदली जंगलों में रहते थे। उनसे कहा गया था कि जंगल में ओरांगुटान पर स्टडी नहीं की जा सकती, लेकिन उन्होंने जो किया वो मिसाल बन गया।
बोर्नियो के तंजुंग पुटिंग रिजर्व नेशनल पार्क पहुंचकर गैल्डिकास ने जंगल में ओरांगुटान की इकोलॉजी और व्यवहार को देखना शुरू किया। गैल्डिकास की रिसर्च से इस वनमानुष प्रजाति के बारे में कई नई बातें पता चलीं। इसमें सबसे अहम ओरांगुटान के बच्चों के जन्म की बीच असामान्य रूप से लंबे अंतर के बारे में पता चला। तंजुंग पुटिंग में यह समय औसतन 7.7 साल का होता है। उन्होंने पता लगाया कि ओरांगुटान जंगल में 400 अलग-अलग तरह की चीजें खाते हैं।
