मुख्यमंत्री निवास में फूट पड़ा दिव्यांग पर्यटन अधिकारी का दर्द… कहा – 1 रुपया भी नहीं बचा या तो….
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम उस वक्त भावुक हो गया, जब छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में कार्यरत दिव्यांग संविदा अधिकारी विनोद कुमार मारकंडे अपनी फरियाद लेकर पहुंचे. हाथ में आवेदन, आंखों में आंसू और आवाज में टूटा हुआ हौसला. विनोद कुमार मारकंडे ने बताया कि वह इससे पहले तीन बार जनदर्शन में आ चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ. कहा—”पर्यटन मंत्री ने भी मेरे लिए पत्र लिखा था, लेकिन विभाग ने उस पत्र को भी नहीं माना. अब समझ नहीं आता कहां जाऊं, किससे गुहार लगाऊं.”
विनोद की आवाज़ भर्राने लगती है जब वह अपनी आर्थिक हालत बताते हैं—”मेरे पास आज एक रुपया भी नहीं बचा है. ले-दे करके यहां तक पहुंच पाया हूं. मैं बहुत परेशान हो चुका हूं. अब तो लगता है या तो मुझे नौकरी दीजिए या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दीजिए.”
विनोद ने बताया कि वह पहले टूरिज्म विभाग में अच्छी तरह काम कर रहे थे, लेकिन सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए.सिर में गंभीर चोट आई, ऑपरेशन हुआ और उसी हादसे ने उन्हें दिव्यांग बना दिया.
इलाज के लिए मैंने सब कुछ बेच दिया.आज हालत यह है कि न नौकरी बची, न जमा पूंजी- विनोद कुमार मारकंडे, दिव्यांग संविदा अधिकारी, टूरिज्म बोर्ड
विनोद की पारिवारिक स्थिति और भी ज्यादा दर्दनाक है. वे बताते हैं “मां पिछले 5 साल से बिस्तर पर हैं, पत्नी खुद दिव्यांग हैं, छोटी-छोटी बेटियां हैं, और अब 4 महीने से स्कूल की फीस तक जमा नहीं हो पा रही है. पूरा परिवार मुझ पर ही निर्भर है लेकिन अब मैं ही बेबस हो गया हूं.”
विनोद ने बताया कि उनका संविदा कार्यकाल 8 बार बढ़ाया गया, लेकिन अब 11 दिसंबर 2024 को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया. उन्होंने मुख्यमंत्री को दिए आवेदन में साफ लिखा है कि “अगर मेरी सेवा नहीं बढ़ाई गई, तो मेरे परिवार के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी.”
जनदर्शन में मुख्यमंत्री को आवेदन सौंपते हुए विनोद ने कहा “अब आप ही मेरी आखिरी उम्मीद हैं अगर यहां से भी निराशा मिली, तो मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचेगा.”
