‘पहले भी पेपर लीक होते रहे…’ जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस को घेरा..

एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के लिए छह घंटे का समय तय किया गया था. विपक्षी सदस्य कम से कम दो घंटे बढ़ाने की मांग कर रहे थे. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल पर हम 10 घंटे भी चर्चा के लिए तैयार हैं. इसके बाद स्पीकर ने सदन का सेंस लेकर 10 घंटे चर्चा कराने की घोषणा कर दी.

स्पीकर ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए महत्वपूर्ण है, जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस बिल पर चर्चा के लिए सहमत हुए. इस बिल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं को और अधिक शुचितापूर्ण बनाना है. परीक्षा प्रणाली की विशिष्टता और पारदर्शिता राष्ट्रहित का महत्वपूर्ण विषय है. पूरा देश चाहता है कि सभी सदस्य सार्थक विचार साझा करें और रचनात्मक विचार रखें, जिससे हम एक बेहतर कानून बना सकें. कानून जितना बेहतर होगा, हम परीक्षा प्रणाली को उतना ही शुचितापूर्ण बना सकते हैं.
डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे. पेपर लीक किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है. उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए. भारत में चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं. 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का. 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था. कांग्रेस और यूपीए की सरकारों ने सुझाव नहीं माने. हमने एनटीए का गठन किया. पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया. जून 2024 में लागू किया गया. इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है. हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं.

डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर स्पीडी जस्टिस का प्रावधान इस संशोधन के जरिये कर रहे हैं. इसमें भी हमने समयसीमा तय कर दी है कि जांच दो महीने के भीतर सारी जांच मुकम्मल की जाएगी और उसके बाद जो भी ट्रायल कोर्ट होगा, उसमें तीन महीने. जिस दिन वारदात हुआ है, उस दिन से निर्णय आने तक, पांच महीने से ज्यादा समय नहीं लगेगा. उसके बाद कोई अपील करना चाहे, तो 30 दिन के भीतर कर सकेगा और डबल बेंच से नीचे हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होगी. महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आए हैं, सरकार की प्रतिबद्धता का इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि बिल लाने के साथ ही साथ कानून मंत्री की ओर से प्रस्ताव जारी कर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन भी शुरू कर दिया गया है. उन्होंने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स के गठन का भी उल्लेख किया और कहा कि राधाकृष्णन कमेटी की मोटी-मोटी 46 सिफारिशों में से 35 को लागू कर दिया गया है. सरकार की नीति ईमानदार है और ये संशोधन भी ईमानदाराना प्रयास के तहत लाया जा रहा है. इन प्रस्तावों से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी और अगर हुई, तो देश की जनता को उनसे आपत्ति होगी.