8000 KM तय कर दोस्त से मिलने आता है पेंगुइन, वजह जानकर भर आएगा दिल
यह कहानी है ब्राजील के मछुआरे ‘जोआओ परेरा डी सूजा’ और एक मैजेलैनिक पेंगुइन ‘डिंडिम द पेंगुइन’ की, जिनकी दोस्ती ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानियां लिख देती है, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इंसान और जानवर के बीच दोस्ती की मिसालें आपने जरूर सुनी होंगी, लेकिन एक मछुआरे और पेंगुइन के बीच ऐसा अटूट रिश्ता वाकई दिल को छू लेता है। यह कहानी है ब्राजील के मछुआरे ‘जोआओ परेरा डी सूजा’ और एक मैजेलैनिक पेंगुइन ‘डिंडिम द पेंगुइन’ की, जिनकी दोस्ती ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। साल 2011 में रियो डी जनेरियो के पास प्रोवेटा बीच पर जोआओ को एक कमजोर और घायल पेंगुइन मिला। उसका शरीर तेल से सना हुआ था, पंख आपस में चिपक चुके थे और वह खुद को गर्म रखने में असमर्थ था। हालत ऐसी थी कि उसकी जान कभी भी जा सकती थी।
जोआओ उसे अपने घर ले आए और कई हफ्तों तक उसकी देखभाल की। उन्होंने धीरे-धीरे उसके शरीर से तेल साफ किया, उसे खाना खिलाया और तब तक संभाला, जब तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो गया। जब पेंगुइन ठीक हो गया, तो जोआओ ने उसे समुद्र में छोड़ दिया। उस वक्त यह एक सामान्य विदाई थी, कम से कम उन्हें यही लगा। लेकिन कुछ महीनों बाद जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। वही पेंगुइन वापस लौटा, सीधे उसी बीच पर, और फिर जोआओ के घर तक पहुंच गया। इसके बाद यह सिलसिला हर साल जारी रहा, मानो दोनों के बीच कोई अनदेखा रिश्ता बन चुका हो। मैजेलैनिक पेंगुइन आमतौर पर पैटागोनिया (अर्जेंटीना-चिली) के ठंडे इलाकों में रहते हैं। लेकिन डिंडिम हर साल करीब 8000 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय करके ब्राजील पहुंचता है, सिर्फ अपने दोस्त से मिलने के लिए। वह जून के आसपास आता है और फरवरी तक जोआओ के साथ समय बिताता है।
वैज्ञानिकों ने उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसे टैग भी किया था, जिससे साफ हुआ कि हर बार लौटने वाला वही पेंगुइन है। जोआओ बताते हैं कि जैसे ही डिंडिम उन्हें देखता है, वह खुशी से आवाजें निकालता है, उनके पीछे-पीछे चलता है, बिल्कुल किसी पालतू कुत्ते की तरह। हैरानी की बात यह है कि वह सिर्फ जोआओ को ही पहचानता है और बाकी लोगों से दूरी बनाए रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी पेंगुइन का इस तरह किसी इंसान से जुड़ाव बेहद दुर्लभ है।
