इंदौर में दूषित पानी पीने से डेढ़ सौ लोग बीमार, 40 मरीज अस्पतालों में, 4 लोगों की मौत
देशभर में स्वच्छता के तमगे पहनने वाला इंदौर शहर एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हुआ है। भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई ने ऐसा कहर बरपाया कि 4 लोगों की जान चली गई। चार सौ से ज्यादा रहवासी अस्पताल पहुंच गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इंदौर नगर निगम को दो महीने पहले से शिकायतें मिल रही थीं। लेकिन सिस्टम तब तक नहीं जागा जब तक लाशें नहीं गिरीं। भागीरथपुरा में पिछले करीब दो महीनों से पानी में बदबू, रंग बदलने और गंदगी की शिकायतें की जा रही थीं। रहवासियों ने हेल्पलाइन, जोन कार्यालय, पार्षद-हर स्तर पर गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। न पानी बदला गया, न लाइनें जांची गईं।
25 दिसंबर को सबसे पहले एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ी। उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत के बाद जैसे-जैसे दिन बढ़े, मरीजों की संख्या भी बढ़ती चली गई। इसके बाद हालात हर दिन और भयावह होते चले गए। नंदलाल पाल के बेटे सिद्धार्थ पाल का कहना है कि पानी पीने के बाद उनके पिता को उल्टी-दस्त शुरू हुए, हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि यदि नगर निगम ने समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया होता, तो यह मौत टाली जा सकती थी। मैंने ही बहुत सी शिकायतें की पानी को लेकर, मैं ही नहीं न जाने कितनी शिकायत 181 पर की, लेकिन किसी की नहीं सुनवाई हुई। नतीजा सामने है।
नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने नंदलाल पाल की मौत को कार्डियक अरेस्ट बताया। इस बयान ने लोगों का गुस्सा और भड़का दिया। परिजनों का कहना है कि नंदलाल को पहले कोई गंभीर हृदय रोग नहीं था। बीमारी दूषित पानी से शुरू हुई, मौत सिस्टम की लापरवाही से हुई।
65 वर्षीय उर्मिला यादव की मौत ने सिस्टम की संवेदनहीनता को और उजागर कर दिया। उनके बेटे संजय यादव का कहना है कि वे एक महीने से पानी की शिकायत कर रहे थे। दुखद यह कि उर्मिला की मौत के बाद संजय का 11 माह का बेटा भी दूषित पानी से बीमार होकर चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती है।
तीन दिनों के भीतर हालात इतने बिगड़ गए कि 400 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हो गए। इनमें सबसे ज्यादा महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बुखार और कमजोरी आम शिकायत बन गई।
