PM बोले-डीपफेक रोकने के लिए AI कंटेंट पर लेबल लगे, गूगल CEO पिचाई ने कहा.. यह अरबों लोगों की जिंदगी बदलेगा

दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आज गुरुवार को चौथा दिन है। आज के सत्र में PM नरेंद्र मोदी ने कहा- डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए ताकि असली और एआई-जनरेटेड कंटेंट में फर्क पता चल सके। साथ ही, बच्चों की सुरक्षा के लिए एआई स्पेस को चाइल्ड सेफ बनाना जरूरी है। इससे पहले गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने कहा- AI को सबके लिए उपयोगी बनाने के लिए हमें साहसिक कदम उठाने होंगे, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगियों को बेहतर बना सकता है।

समिट को आज कई ग्लोबल लीडर्स संबोधित कर रहे हैं। यह समिट 20 फरवरी तक चलेगी। इसमें आज 110 से ज्यादा देश, 20 से ज्यादा देशों के प्रमुख, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500+ दुनिया के AI लीडर शामिल हुए हैं। समिट में करीब 100 CEOs और फाउंडर्स, 150 अकादमिक और रिसर्चर, 400 CTOs, VPs, 100+ सरकारी प्रतिनिधि मौजूद हैं।

पीएम ने स्पष्ट किया कि दुनिया के कई देशों में जहां एआई को लेकर भय का माहौल है, वहीं भारत इसे अपने ‘भाग्य’ और उज्ज्वल भविष्य के रूप में देख रहा है। भारत इसे अपनी विकास यात्रा का अगला बड़ा टर्निंग पॉइंट मानता है। मोदी ने एआई के लिए एक नया ग्लोबल फ्रेमवर्क दिया। उन्होंने कहा कि एआई Moral (नैतिक), Accountable (जवाबदेह), National Sovereignty (संप्रभुता), Accessible (सुलभ) और Valid (वैध) होना चाहिए, ताकि यह केवल डेटा पॉइंट न बनकर मानवता के कल्याण का जरिया बने।डीपफेक और फेक न्यूज के खतरे को देखते हुए पीएम ने सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या एआई द्वारा बनाया गया (फैब्रिकेटेड) है।

भारत ने दुनिया की ‘कॉन्फिडेंशियल’ सोच से अलग हटकर एआई कोड को ‘ओपन शेयर’ करने की बात कही। पीएम का मानना है कि जब तकनीक सबके लिए खुली होगी, तभी दुनिया भर के युवा दिमाग उसे बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे। पीएम ने भरोसा दिलाया कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा बल्कि नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि हम ऐसे युग में हैं जहां इंसान और मशीन ‘Co-create’ (साथ मिलकर सृजन) करेंगे। उन्होंने स्किलिंग और रिस्किलिंग को एक ‘मास मूवमेंट’ बनाने पर जोर दिया।