दक्षिण कोरिया की तरफ मुंह बाए खड़ी हैं तोपें, किम जोंग उन की नई चाल, क्या अब नई जंग की बारी है?

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है. दक्षिण कोरिया की एक ऑब्जरवेटरी से उत्तर कोरिया की तरफ देखने पहुंचे लोगों को सीमा के पास ऐसी बख्तरबंद गाड़ियां दिखाई दीं, जिनकी तोपों का मुंह दक्षिण की ओर था. शुक्रवार को यहां एक गाड़ी नजर आई थी, लेकिन सोमवार तक ऐसी तीन गाड़ियां दिखाई देने लगीं. इसके अलावा, करीब 30 उत्तर कोरियाई सैनिक विवादित सीमा क्षेत्र में बाड़ लगाने का काम करते भी दिखे. इस घटनाक्रम से पहले दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ाने वाले कई बयान सामने आ चुके हैं.

दक्षिण कोरियाई मीडिया की तस्वीरों में सीमा के पास एक बख्तरबंद वाहन साफ दिखाई दिया. बाद में ऐसे तीन वाहन नजर आए, जिनकी तोपें विसैन्यीकृत क्षेत्र यानी DMZ की ओर थीं. इनमें से एक वाहन को 122 मिमी की सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप माना जा रहा है. यह उत्तर कोरिया का एक पुराना तोपखाना सिस्टम है, जिसके 1970 के दशक के आखिरी वर्षों में सेना में शामिल होने का अनुमान है. इस तोप की अधिकतम मारक दूरी करीब 24 किमी बताई गई है. इसकी पहुंच में दक्षिण कोरिया का जिम्पो शहर भी आता है, जहां से उत्तर कोरिया की सीमा पर नजर रखी जाती है. हालांकि, यह तोप उत्तर कोरिया के नए आर्टिलरी सिस्टम के मुकाबले कम ताकतवर मानी जाती है.

दक्षिण कोरिया के एगीबोंग ऑब्जर्वेटरी से उत्तर कोरिया का काएफुंग इलाका करीब 1.2 किमी की दूरी पर है. यहां पहुंचे 83 साल के जंग गिल-सियोंग, जो वियतनाम युद्ध में लड़ चुके हैं, ने कहा कि उन्होंने उत्तर कोरिया की ऐसी तोपों के बारे में टीवी पर देखा था, लेकिन उन्हें सामने देखकर खतरे का एहसास ज्यादा हुआ. उन्होंने चिंता जताई कि भविष्य में इस खतरे से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया को कितनी तैयारी करनी पड़ेगी.

सियोल के आसन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज के सैन्य विशेषज्ञ यांग उक का मानना है कि इन तोपों की तैनाती को सैन्य क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी के बजाय ताकत दिखाने की कोशिश के तौर पर देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि गाड़ियों को ऐसी जगह रखा गया, जहां से वे आसानी से दिखाई दे सकें. इससे लगता है कि उत्तर कोरिया चाहता था कि लोग और दक्षिण कोरियाई पक्ष उन्हें देखें. दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता जांग दो-यंग ने मंगलवार को कहा कि उत्तर कोरिया ने हालिया बयानों में नए हथियार सिस्टम का जिक्र किया है, लेकिन दक्षिण कोरिया इन तोपों की तैनाती को ऐसा नया हथियार सिस्टम नहीं मानता.

इस बीच, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद DMZ पर्यटकों के लिए लोकप्रिय जगह बनी हुई है. कनाडा से आई 28 साल की पर्यटक हन्ना रॉबिंस ने बताया कि उनके टूर ग्रुप को तोपों के बारे में तब पता चला, जब गाइड ने वेधशाला पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि समूह के लोग डरे हुए थे. गाइड ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उत्तर कोरिया गोली नहीं चलाएगा, लेकिन इसके बावजूद चिंता बनी हुई है.