गुजरात में हुई हिंसा को पुलिस ने बताया विदेशी साजिश

राष्ट्रीय

रामनवमी के दिन कई राज्यों से हिंसा और दो समुदायों में आपसी मतभेद की खबरें सामने आई हैं. गुजरात में हिंसक घटनाएं हुईं. गुजरात पुलिस ने इन घटनाओं को लेकर बड़ा दावा किया है. पुलिस का कहना है कि रामनवमी पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए विदेश में साजिश रची गई है.

यह दावा आणंद जिले के पुलिस अधीक्षक अजीत राजियां ने किया है. उन्होंने कहा, विदेश में बैठे कुछ संगठनों के जरिए रामनवमी पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई. इतना ही नहीं उन्होंने कहा, आणंद के खंभात में हुई हिंसा भी एक सोची समझी साजिश थी.

अजीत राजियां ने कहा, खंभात में 1 मौलवी और उसके दो सहायक मौलवियों ने पहले से हिंसा भड़काने की साजिश रची थी. उन्होंने बताया कि मुस्तकीम मौलवी, और उसके दो साथी मतीन और मोहसिन ने साजिश के खंभात में हिंसा फैलाई.

दरअसल, रामनवमी के मौके पर गुजरात के साबरकांठा और आणंद में बवाल हो गया था. दोनों ही जिलों में रामनवमी के दौरान निकाली जा रही शोभायात्रा पर दूसरे पक्ष के लोगों ने पथराव कर दिया था. बवाल के दौरान दोनों ही जिलों में उपद्रवियों ने गाड़ियों और कुछ दुकानों को आग के हवाले कर दिया था.

इस हिंसा को लेकर पुलिस अधीक्षक अजीत राजियां ने बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि इन मौलवियों के अलावा रजाक अयूब, हुसैन हाशमशा दीवान भी साजिश का हिस्सा रहे. इन लोगों पर लोगों को पथराव और आगजनी के लिए उकसाने का आरोप है.

खंभात में हुई हिंसा में 1 की मौत हो गई थी. जबकि कई लोग घायल हुए थे. पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. अजीत राजियां ने बताया कि जिस दिन प्रशासन से शोभायात्रा की अनुमति मिली थी, उसी दिन यह पूरी साजिश रची गई.

उन्होंने बताया कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए कुछ बाहर के लोगों को खंभात बुलाया गया. रविवार को शोभायात्रा थी, जबकि शनिवार रात तक सभी को इकठ्ठा किया गया. यहां तक कि पत्थर और जरूरी बाकी सामान जिससे ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचे वह इकठ्ठा किया गया.

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने मस्जिद के पास से शोभायात्रा निकलने पर ही पथराव करने की बात कही थी. इसी प्लानिंग के तहत पथराव और फिर आगजनी की गई. पथराव के लिए आए लोगों को भरोसा दिया गया था कि उन्हें कुछ नहीं होने दिया जाएगा. साथ ही उनकी कानूनी मदद की जाएगी. इस वारदात को अंजाम देने के लिए पैसे भी इकट्ठा किए गये थे.