पुरी रथयात्रा, तीनों रथ गुंडिचा मंदिर पहुंचे, अब तीनों देवता 9 दिन मौसी के घर रहेंगे

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार दोपहर गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अब तीनों देवता 9 दिन अपनी मौसी के घर रहेंगे। इसके साथ ही रथयात्रा पूरी हुई। इसके पहले रथयात्रा शुक्रवार सुबह दूसरे दिन शुरू हुई। बह बारिश और उमस के बीच 9 लाख श्रद्धालु फिर से रथ खींचने के लिए ग्रैंड रोड पर जुटे। गुरुवार को पाहंडी अनुष्ठान में हुई देरी और अंधेरा होने के कारण तीनों रथ गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके थे। तीनों देवता रातभर अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहे।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि सभी अनुष्ठान समय पर हुए, लेकिन भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से पाहंडी अनुष्ठान एक घंटे से अधिक देर से पूरा हुआ।

उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ ग्रैंड रोड पर करीब 700 मीटर चलकर मार्केट चौक पर रुका। देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ लगभग 400 मीटर चलकर मरीचिकोट चौक तक पहुंचा। वहीं भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ कुछ ही दूरी तय कर मुख्य मंदिर के सिंहद्वार के पास रुक गया था।

बारिश और उमस के बावजूद लाखों श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयघोष के बीच रथ खींचते रहे। ग्रैंड रोड पर झांझ, नगाड़ों, शंख और तुरहियों की गूंज के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। बारिश का पानी जमा न हो, इसके लिए ग्रैंड रोड पर विशेष इंतजाम किए गए, ताकि रथयात्रा बिना रुकावट आगे बढ़ सके।

पाहंडी के दौरान भगवान जगन्नाथ के पारंपरिक फूलों के मुकुट ‘तहिया’ के नहीं दिखने पर अरविंद पाधी ने बताया कि बारिश से भीगकर यह भारी हो गया था। इसलिए उसे हटा दिया गया।उन्होंने यह भी कहा कि भगवान, बलभद्र और सुभद्रा शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे। इसके बाद शनिवार को गुंडिचा मंदिर में प्रवेश की रस्म पूरी की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को इन तीनों देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।

गुरुवार को लगातार बारिश के बीच भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा हुई। सरकार ने रथयात्रा के दौरान हुई दो श्रद्धालुओं की मौत पर कहा कि दोनों मौतें भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में किसी कमी की वजह से नहीं हुईं।

CMO के मुताबिक, रथयात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 7 श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया था। इनमें 60 साल के एक श्रद्धालु की मौत हुई, जिसकी वजह का अभी पता लगाया जा रहा है। वहीं, 35 वर्ष से ज्यादा उम्र के दूसरे श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत हुई।

राज्य सरकार के मुताबिक, रथयात्रा में करीब 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। देर शाम तक महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 200 मीटर, भगवान बलभद्र का रथ 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ 700 मीटर बढ़कर रुक गया। अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे पूजा-भोग के बाद रथ यात्रा फिर शुरू होगी।