पूरे देश में बारिश हो रही… लेकिन दिल्ली क्यों सूखी?
भारत में मॉनसून का मौसम हमेशा से किसानों, आम लोगों और अर्थव्यवस्था का लाइफलाइन रहा है. जुलाई 2026 में भी पूरे देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की अच्छी गतिविधि देखी जा रही है. भारी बारिश और गरज-चमक के साथ कई राज्यों में जीवन सामान्य रूप से प्रभावित हो रहा है. राजधानी दिल्ली समेत उत्तराखंड, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े इलाके इस मॉनसून की बारिश से लगभग कोसों दूर हैं. ये क्षेत्र सूखे पड़े हुए हैं जहां दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. यह स्थिति सामान्य नहीं है. इसके पीछे मौसम के दो बड़े सिस्टम्स – मध्य भारत में बनी मॉनसून ट्रफ और पश्चिम में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस साल मॉनसून ने समय पर दस्तक दी थी. दक्षिण भारत, मध्य भारत, पूर्वी और पश्चिमी तटों पर अच्छी बारिश हो रही है. मुंबई जैसे शहरों में भारी बारिश से जलाशय भर रहे हैं, जबकि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के हिस्सों में बारिश से कृषि कार्यों को बढ़ावा मिल रहा है.
उत्तरी भारत का एक बड़ा हिस्सा इस बारिश से वंचित रह गया है. दिल्ली-NCR में जुलाई के मध्य तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. इससे न सिर्फ तापमान ऊंचा बना हुआ है बल्कि ह्यूमिडिटी भी बढ़ गई है, जिससे लोग दिन-रात असहज महसूस कर रहे हैं.
मॉनसून ट्रफ लाइन मौसम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता होती है. यह कम दबाव की वह रेखा है जहां मॉनसून की नमी वाली हवाएं मिलती हैं. ऊपर उठकर बादल बनाती हैं. इस बार यह ट्रफ मध्य भारत में काफी सक्रिय है. इसका मतलब है कि राजस्थान के दक्षिणी हिस्से, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आसपास का क्षेत्र बारिश का मुख्य केंद्र बन गया है.
जब ट्रफ यहां स्थित होती है तो उत्तर भारत में हवाओं का फैलाव होता है. फैलाव का मतलब है कि हवाएं एक जगह से फैल रही हैं बजाय इकट्ठा होने के. जब हवाएं फैलाव करती हैं तो ऊपर उठने का प्रोसेस कमजोर पड़ जाती है. नतीजतन बादल नहीं बन पाते और बारिश नहीं होती.
दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में यही हो रहा है. ट्रफ के उत्तर की ओर होने के कारण इन इलाकों में शुष्क हवाएं प्रभावी हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भी यही स्थिति है जहां सामान्यतः मॉनसून में भारी बारिश होती है लेकिन इस बार सूखा सा माहौल है. यह डाइवर्जेस इंडूय्शड ड्राई स्पेल कई दिनों से जारी है. अगर ट्रफ जल्दी उत्तर की ओर शिफ्ट न हुई तो यह और लंबा खिंच सकता है.
दूसरा बड़ा फैक्टर पश्चिमी विक्षोभ है. ये मध्य एशिया से आने वाली एक्स्ट्रा-ट्रॉपिकल स्टॉर्म होती हैं जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड को बारिश देती हैं. लेकिन इस समय विक्षोभ पश्चिम में स्थित है जिसने उत्तरी भारत में हवाओं की दिशा को प्रभावित किया है.
विक्षोभ के कारण ठंडी और सूखी हवाएं उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही हैं जो मॉनसून की नम हवाओं को दबा रही हैं. दिल्ली-NCR में इस वजह से आकाश साफ रह रहा है. हल्के बादल छाए रहते हैं लेकिन बारिश नहीं हो पा रही. दिन में सूरज की तेज धूप से तापमान 35-38 डिग्री तक पहुंच रहा है.
रात में ह्यूमिडिटी 70-80 प्रतिशत होने से गर्मी महसूस हो रही है. यह कॉम्बीनेशन लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है – हीट स्ट्रेस, थकान और सांस की तकलीफ बढ़ रही है. किसानों के लिए भी चिंता है क्योंकि खरीफ फसलों की सिंचाई पर निर्भरता बढ़ गई है.
उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर टिकी है. दिल्ली-NCR, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में गेहूं, चावल, गन्ना और सब्जियों की खेती होती है. मॉनसून की बारिश न होने से मिट्टी सूख रही है. भूजल स्तर गिरने का खतरा बढ़ गया है. कई जिलों में किसान ट्यूबवेल पर निर्भर हो गए हैं जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है. अगर यह सूखा कुछ हफ्ते और चला तो फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
दिल्ली जैसे महानगर में पानी की उपलब्धता पहले से चुनौतीपूर्ण है. यमुना नदी का जल स्तर कम है. बारिश न होने से ग्राउंडवाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा. इससे भविष्य में पानी की किल्लत गहरा सकती है. हालांकि मौसम विभाग उम्मीद जता रहा है कि अगले कुछ दिनों में ट्रफ के उत्तर की ओर शिफ्ट होने पर स्थिति सुधर सकती है. लेकिन फिलहाल राहत की कोई तत्काल संभावना नहीं दिख रही.
IMD के अनुसार अगले 3-4 दिनों में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम हो सकता है. ट्रफ थोड़ी उत्तर की ओर खिसक सकती है. इससे दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी यूपी में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. लेकिन भारी बारिश की उम्मीद अभी कम है.
जलवायु परिवर्तन के दौर में मॉनसून पैटर्न में बदलाव आ रहे हैं. वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं ताकि बेहतर पूर्वानुमान दिए जा सकें. फिलहाल दिल्ली और आसपास के इलाकों के निवासियों को सूखे मॉनसून का सामना करना पड़ रहा है जबकि देश के बाकी हिस्से पानी से भरपूर हैं.
