दूध, किशमिश और बादाम खाकर दौड़ता है ‘राजधानी एक्सप्रेस’
पटना के कृष्णा नगर स्थित चकारन गांव का एक घोड़ा इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. ‘राजधानी एक्सप्रेस’ नाम का यह घोड़ा अपनी शानदार रफ्तार, दमदार नस्ल और लगातार जीत के कारण चर्चा में है. पाकिस्तान की सिंध नस्ल के इस घोड़े ने कम उम्र में ही करीब 20 रेस जीतकर अपनी अलग पहचान बना ली है. इसकी फिटनेस बनाए रखने के लिए रोजाना दूध, काजू, बादाम और किशमिश जैसी पौष्टिक चीजें खिलाई जाती हैं, जबकि इसकी देखभाल के लिए चार लोगों की टीम तैनात रहती है. यही वजह है कि 30 लाख रुपये तक का ऑफर मिलने के बावजूद इसके मालिक बिट्टू यादव इसे बेचने को तैयार नहीं हैं. पटना के कृष्णा नगर स्थित चकारन गांव में रहने वाले बिट्टू यादव इन दिनों अपने खास घोड़े “राजधानी एक्सप्रेस” की वजह से लोगों के बीच चर्चा में हैं. घोड़ों के शौकीनों के लिए यह घोड़ा किसी आकर्षण से कम नहीं है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी नस्ल है.
बिट्टू यादव बताते हैं कि यह पाकिस्तान के सिंध नस्ल का घोड़ा है, जिसे घोड़ों की दुनिया में बेहद ताकतवर, फुर्तीला और रेसिंग के लिए शानदार माना जाता है. यही वजह है कि कम उम्र में ही यह घोड़ा अपनी अलग पहचान बना चुका है. इसकी रफ्तार को देखते हुए इसका नाम ‘राजधानी एक्सप्रेस’ रखा गया है. गांव के लोग बताते हैं कि जब यह दौड़ता है तो इसकी गति देखने लायक होती है. घोड़ा अभी किशोर अवस्था में है, यानी पूरी तरह जवान भी नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह अब तक करीब 20 रेस जीत चुका है. स्थानीय स्तर से लेकर कई बड़े आयोजनों में इसने अपनी तेज चाल और शानदार प्रदर्शन से लोगों को प्रभावित किया है. घोड़े की जीत के बाद मालिक बिट्टू यादव का नाम भी घोड़ा प्रेमियों के बीच तेजी से चर्चित हुआ है.
घोड़े की फिटनेस और ताकत बनाए रखने के लिए उसके खानपान पर बेहद विशेष ध्यान दिया जाता है. बिट्टू यादव बताते हैं कि “राजधानी एक्सप्रेस” को रोजाना करीब 3 लीटर दूध दिया जाता है. इसके अलावा इसके डाइट में काजू, बादाम और किशमिश जैसी चीजें भी शामिल हैं ताकि इसकी ऊर्जा बनी रहे. घोड़े को सुबह और शाम नियमित रूप से मैदान में दौड़ाया जाता है. उसकी बॉडी और मांसपेशियां मजबूत रहें, इसके लिए खास तरीके से ट्रेनिंग भी कराई जाती है. सिर्फ खानपान ही नहीं, इसकी देखरेख भी किसी वीआईपी की तरह की जाती है. घोड़े की सेवा और निगरानी के लिए चार लोगों को रखा गया है. ये लोग इसके नहाने, साफ-सफाई, भोजन, ट्रेनिंग और आराम का पूरा ध्यान रखते हैं. गर्मी के मौसम में इसे विशेष देखभाल दी जाती है ताकि इसकी सेहत पर असर न पड़े. घोड़े के रहने की जगह को भी साफ और आरामदायक रखा गया है.
बिट्टू यादव बताते हैं कि “राजधानी एक्सप्रेस” की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि कई लोग इसे खरीदने के लिए बड़ी रकम ऑफर कर चुके हैं. एक बार 20 लाख रुपये और दूसरी बार 30 लाख रुपये तक की पेशकश हुई, लेकिन उन्होंने दोनों बार घोड़ा बेचने से साफ इनकार कर दिया. उनका कहना है कि यह घोड़ा उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बल्कि जुनून और सम्मान की बात है. उन्होंने इसे बचपन से अपने हाथों से पाला है, इसलिए इससे भावनात्मक लगाव भी काफी गहरा है.
गांव के लोगों के बीच भी “राजधानी एक्सप्रेस” किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है. दूर-दूर से लोग इस खास घोड़े को देखने चकारन गांव पहुंचते हैं. बच्चे इसकी फोटो खिंचवाते हैं तो युवा इसकी चाल और ताकत को देखकर प्रभावित हो जाते हैं. बिट्टू यादव का सपना है कि आने वाले दिनों में “राजधानी एक्सप्रेस” बड़े स्तर की राष्ट्रीय रेसों में हिस्सा ले और अपने गांव तथा बिहार का नाम रोशन करे.
